सात महीने बाद भी नहीं मिली पीएम द्वारा जारी राशि: मध्य प्रदेश की 25 लाख ग्रामीण महिलाओं के खाते में नहीं पहुँचे 179 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 अप्रैल को मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए जारी किए गए 179 करोड़ रुपये अब तक उनके खातों में नहीं...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 अप्रैल को मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए जारी किए गए 179 करोड़ रुपये अब तक उनके खातों में नहीं पहुँचे हैं। राज्य सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया कि सात महीने बीत जाने के बाद भी यह राशि किसी भी स्वयं सहायता समूह (Self-Help Group – SHG) तक नहीं पहुँची है।
यह खुलासा कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा उठाए गए प्रश्न पर हुआ, जिसमें उन्होंने पूछा था कि प्रधानमंत्री द्वारा बिहार के मधुबनी में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान देशभर के SHGs—जिनमें मध्य प्रदेश के समूह भी शामिल थे—को आजीविका कार्यक्रम अंतर्गत जारी की गई राशि का क्या हुआ।
🔸 विभाग की स्वीकारोक्ति: “अब तक एक रुपये भी नहीं भेजा गया”
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में ग्रामीण विकास विभाग, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन संचालित करता है, ने माना कि 179 करोड़ की पूरी राशि राज्य को आवंटित तो हुई, लेकिन अभी तक किसी SHG को ट्रांसफर नहीं की गई है।
यह राशि SHGs को रीवॉल्विंग फंड, कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट (CF&CIF) मद के तहत दी जानी थी।
🔸 5 लाख में से 2 लाख SHGs प्रभावित, 25 लाख महिलाएँ इंतजार में
प्रताप ग्रेवाल ने बताया कि राज्य में लगभग 5 लाख SHGs सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 2 लाख समूहों—यानी 25 लाख महिलाएँ—फंड रिलीज़ का इंतजार कर रही हैं।
SHGs मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण महिलाओं के लिए जीवनयापन का बड़ा साधन हैं।
उन्होंने कहा कि
“ये समूह सिलाई, कृषि-आधारित कार्य, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और अन्य छोटे व्यवसायों के जरिए महिलाओं को आजीविका देते हैं। सात महीने तक पैसा न मिलना सीधी आर्थिक चोट है।”
🔸 फंड न मिलने से 7 लाख महिलाओं ने छोड़ दिए समूह?
विधायक ने दावा किया कि
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बैंक खाते खोलने में कठिनाइयाँ,
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सरकारी प्रक्रियाओं में देरी,
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और समय पर पैसा न मिलने के कारण
साल भर में लगभग 7 लाख महिलाओं ने अपने SHGs भंग कर दिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की घोषणा “कागज़ी और चुनावी वादा” बनकर रह गई, क्योंकि अधिकारी समय पर काम नहीं कर पाए।
🔸 देरी का क्या असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, SHGs के लिए रीवॉल्विंग फंड किसी भी माइक्रो-उद्यम की शुरुआत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पूंजी होती है। इसके न मिलने से:
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महिलाओं के छोटे व्यवसाय रुक जाते हैं,
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बैंक से ऋण लेने में कठिनाई बढ़ती है,
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समूहों की आर्थिक साख प्रभावित होती है,
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और महिला आजीविका मिशन के लक्ष्य अधूरे रह जाते हैं।
🔸 आगे क्या?
विपक्ष ने सरकार से स्पष्टीकरण और त्वरित कार्रवाई की माँग की है। विभाग का कहना है कि “प्रक्रियागत कारणों” से देरी हुई और जल्द राशि जारी की जाएगी।
हालाँकि, सात महीने की देरी यह सवाल छोड़ जाती है कि क्या राज्य-स्तरीय समन्वय में कोई गंभीर खामी है, या फिर यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
