मध्यप्रदेश कफ सिरप कांड: 24 बच्चों की मौत के मामले में सरकारी डॉक्टर की पत्नी ज्योति सोनी गिरफ्तार, SIT ने परासिया से दबोचा
। 🧪 पृष्ठभूमि: 24 बच्चों की मौत से हिला प्रदेश मध्यप्रदेश के कई जिलों में हुई ‘किलर कफ सिरप’ त्रासदी ने पूरे राज्य को झकझोर...

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🧪 पृष्ठभूमि: 24 बच्चों की मौत से हिला प्रदेश
मध्यप्रदेश के कई जिलों में हुई ‘किलर कफ सिरप’ त्रासदी ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। इस हादसे में 24 बच्चों की मौत हुई थी। जांच में सामने आया कि तमिलनाडु स्थित स्रेसन फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित ‘कोल्डरिफ कफ सिरप’ के एक बैच में 48.6% डायथिलीन ग्लाइकोल (DEG) पाया गया — जो एक औद्योगिक रसायन है और मानव उपभोग के लिए पूरी तरह असुरक्षित है।
इसी जहरीले तत्व ने बच्चों के गुर्दे (किडनी) को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हुई।
🚨 SIT की कार्रवाई: डॉक्टर की पत्नी गिरफ्तार
सोमवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में ज्योति सोनी को छिंदवाड़ा जिले के परासिया से गिरफ्तार किया। वह सरकारी डॉक्टर प्रवीण सोनी की पत्नी हैं, जिन्हें पहले ही इस केस में गिरफ्तार किया जा चुका है।
SIT प्रमुख और परासिया SDOP जितेंद्र जात ने बताया,
“ज्योति सोनी कई हफ्तों से फरार थी और घटना के बाद बेंगलुरु समेत कई जगहों पर छिपी रही। सूचना के आधार पर सोमवार को परासिया से उसे गिरफ्तार किया गया। मंगलवार को उसे अदालत में पेश किया जाएगा।”
🧾 आरोप: सबूत नष्ट करने का मामला
पुलिस जांच में सामने आया है कि ज्योति सोनी अपने नाम से एक मेडिकल स्टोर चलाती थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने कफ सिरप की बिक्री और वितरण से जुड़े अहम सबूतों में हेरफेर और उन्हें नष्ट किया, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक, सोनी का स्टोर कथित रूप से उस सप्लाई चेन का हिस्सा था जिसके जरिए जहरीला सिरप बाजार में पहुंचा।
👥 अब तक सात आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में अब तक कुल सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें शामिल हैं:
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जी. रंगनाथन – स्रेसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक
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के. महेश्वरी – कंपनी की केमिस्ट
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डॉ. प्रवीण सोनी – सरकारी चिकित्सक
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ज्योति सोनी – मेडिकल स्टोर संचालक
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स्थानीय फार्मासिस्ट
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दवा थोक व्यापारी
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छिंदवाड़ा स्थित मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव
⚖️ जांच जारी, और गिरफ्तारी की संभावना
SIT ने बताया कि इस कांड की विस्तृत जांच जारी है और फॉरेंसिक रिपोर्ट, सप्लाई रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया जा रहा है। टीम को संदेह है कि नेटवर्क में और लोग शामिल हो सकते हैं जिन्होंने लापरवाही या आर्थिक लाभ के लिए इस जहरीले सिरप की बिक्री की अनुमति दी।
राज्य सरकार ने पहले ही स्वास्थ्य विभाग और औषधि नियंत्रण प्राधिकरण के कामकाज की आंतरिक जांच का आदेश दिया है।
🧫 सार्वजनिक सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि फार्मास्यूटिकल नियमन प्रणाली की गंभीर विफलता को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दवा निर्माण और वितरण पर निगरानी की कमी, गुणवत्ता परीक्षण में लापरवाही और भ्रष्टाचार की जड़ें इस त्रासदी की वजह बनीं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से आग्रह किया है कि औषधि आपूर्ति तंत्र की पारदर्शिता और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं की सख्ती को प्राथमिकता दी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
निष्कर्ष:
ज्योति सोनी की गिरफ्तारी से SIT की जांच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। अब सभी निगाहें अदालत और जांच एजेंसी पर हैं — क्या यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों की जिम्मेदारी साबित होगा, या फिर राज्य की दवा नियंत्रण प्रणाली में गहरी पड़ताल का रास्ता खोलेगा?
