24 घंटे में शादी, 8 दिन में तलाक: पुणे के डॉक्टर कपल के फैसले ने रिश्तों पर छेड़ी नई बहस
पुणे:प्रेम विवाह को अक्सर आपसी समझ और लंबे रिश्ते की मजबूत नींव माना जाता है, लेकिन पुणे से सामने आए एक मामले ने इस धारणा...
पुणे:
प्रेम विवाह को अक्सर आपसी समझ और लंबे रिश्ते की मजबूत नींव माना जाता है, लेकिन पुणे से सामने आए एक मामले ने इस धारणा को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक उच्च शिक्षित दंपति ने शादी के महज 24 घंटे के भीतर अलग होने का फैसला किया और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सिर्फ आठ दिनों में तलाक भी हासिल कर लिया। इस असाधारण घटनाक्रम ने सोशल मीडिया से लेकर कानूनी और सामाजिक हलकों तक में चर्चा छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, यह दंपति समाज के पढ़े-लिखे और प्रतिष्ठित वर्ग से ताल्लुक रखता है। पति एक जहाज पर वरिष्ठ पद पर कार्यरत है, जबकि पत्नी पेशे से डॉक्टर हैं। दोनों की मुलाकात कई साल पहले हुई थी और धीरे-धीरे दोस्ती प्रेम में बदल गई। लंबे समय तक रिश्ते में रहने के बाद दोनों ने परिवारों की मौजूदगी में विवाह किया।
शादी समारोह के अगले ही दिन सुबह किसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि पत्नी ने घर छोड़ दिया और दोनों ने अलग-अलग रहने का निर्णय ले लिया। इसके बाद उन्होंने आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध समाप्त करने का रास्ता चुना।
रिकॉर्ड समय में पूरी हुई कानूनी प्रक्रिया
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तलाक की पूरी कानूनी प्रक्रिया केवल आठ दिनों में पूरी हो गई। 3 दिसंबर को दंपति की ओर से वकील रानी कांबले-सोनावणे ने पुणे फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की थी।
आमतौर पर हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के मामलों में छह महीने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि होती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हों और साथ रहने की कोई वास्तविक संभावना न हो, तो इस अवधि में छूट दी जा सकती है। कोर्ट ने पाया कि यह जोड़ा पहले ही लगभग डेढ़ साल से अलग रह रहा था और पति को काम के सिलसिले में विदेश जाना था। इन परिस्थितियों को देखते हुए 10 दिसंबर को फैमिली कोर्ट के जज बी. डी. कदम ने तलाक को मंजूरी दे दी।
सुलह की कोशिशें भी रहीं नाकाम
अलगाव के दौरान दोनों परिवारों ने कई बार सुलह कराने की कोशिश की। परिजनों का मानना था कि शादी के बाद समय के साथ मतभेद सुलझ सकते हैं। लेकिन दंपति ने स्पष्ट कर दिया कि उनके वैचारिक मतभेद बहुत गहरे हैं और वे साथ भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते। अंततः दोनों इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि कानूनी रूप से अलग होना ही बेहतर समाधान है।
क्यों बन गया यह मामला चर्चा का विषय
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह केस दिखाता है कि अदालतें अब केवल वैवाहिक अवधि नहीं, बल्कि रिश्ते की वास्तविक स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को भी महत्व दे रही हैं। वहीं समाजशास्त्रियों का कहना है कि यह घटना आधुनिक रिश्तों में अपेक्षाओं, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सहनशीलता के बदलते पैमानों को दर्शाती है।
सोशल मीडिया पर कई लोग इसे जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला बता रहे हैं, तो कुछ इसे आत्मसम्मान और मानसिक शांति को प्राथमिकता देने का साहसिक कदम मान रहे हैं।
बड़ी तस्वीर
तेजी से बढ़ते तलाक के मामलों के बीच यह घटना एक अहम सवाल खड़ा करती है—क्या आज के रिश्तों में संवाद और धैर्य की कमी बढ़ रही है, या लोग अब असफल रिश्तों को ढोने के बजाय समय रहते बाहर निकलना बेहतर समझ रहे हैं? पुणे का यह मामला इसी बदलती सामाजिक सोच का एक उदाहरण बन गया है।
