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भोपाल में 221 निष्क्रिय खातों से ₹44 लाख की हेराफेरी: राष्ट्रीयकृत बैंक के कर्मचारियों समेत छह पर ईओडब्ल्यू का मामला दर्ज

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने राजधानी भोपाल में राष्ट्रीयकृत बैंक के दो कर्मचारियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ 221 निष्क्रिय (डॉर्मेंट) खातों से ₹44.11 लाख...

Dec 10
3 मिनट में पढ़ें
भोपाल में 221 निष्क्रिय खातों से ₹44 लाख की हेराफेरी: राष्ट्रीयकृत बैंक के कर्मचारियों समेत छह पर ईओडब्ल्यू का मामला दर्ज

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने राजधानी भोपाल में राष्ट्रीयकृत बैंक के दो कर्मचारियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ 221 निष्क्रिय (डॉर्मेंट) खातों से ₹44.11 लाख siphon करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों के मुताबिक यह फर्जीवाड़ा कई महीनों तक आंतरिक निगरानी की नज़रों से बचा रहा और बैंक कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर योजनाबद्ध तरीके से रकम निकालकर निजी खातों में ट्रांसफर की।


कैसे पकड़ा गया घोटाला?

ईओडब्ल्यू के डीजी उपेंद्र जैन के अनुसार, बैंक की आंतरिक जांच के दौरान यह पता चला कि दो कर्मचारी—अजय सिंह परिहार और दीपक जैन—ने मिलकर निष्क्रिय खातों को अवैध रूप से सक्रिय किया और रकम अलग-अलग निजी खातों में भेज दी।
जांच में खुलासा हुआ कि कई खातों से ट्रांजैक्शन बैंक की नीतियों के विपरीत और बिना ग्राहक की जानकारी के किए गए थे।


फर्जीवाड़े का तरीका: 70:30 का “मनी शेयरिंग मॉडल”

अधिकारी बताते हैं कि दोनों आरोपियों ने लगभग एक जैसा पैटर्न अपनाकर:

  • निष्क्रिय खातों को अनाधिकृत रूप से सक्रिय किया,

  • रकम को चार परिचितों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया,

  • और फिर एक तय “कमिशन फार्मूला” के तहत पैसे बांटे।

इस फार्मूले के मुताबिक:

  • 70% रकम बैंक कर्मचारी रखते थे,

  • 30% रकम संबंधित खातेधारक या सहयोगी को दी जाती थी

यह प्रक्रिया कई बार दोहराई गई, जिससे कुल मिलाकर ₹44.11 लाख खातों से गायब हो गए।


दूसरे अधिकारियों की IDs का दुरुपयोग

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने:

  • अन्य कर्मचारियों के लॉगिन IDs का गलत इस्तेमाल किया,

  • साइबर फ्रॉड,

  • भेष बदलकर लेनदेन,

  • और अनाधिकृत एक्सेस जैसे गंभीर अपराध किए।

अधिकारियों के अनुसार यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि साइबर अपराध और आंतरिक सुरक्षा में गंभीर चूक का उदाहरण है।


दीपक ने पत्नी के खाते में भेजी रकम

ईओडब्ल्यू के मुताबिक दीपक जैन ने siphoned amount का हिस्सा अपनी पत्नी हेमलता जैन के खाते में भी ट्रांसफर किया। इसी तरह अन्य सहयोगियों—खुशबू खान, अफ़रोज़ खान और कल्पना जैन—के खातों का भी इस्तेमाल किया गया।


इन धाराओं में मामला दर्ज

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, साइबर अपराध और आपराधिक दुरुपयोग से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:

  • दीपक जैन

  • अजय सिंह परिहार

  • खुशबू खान

  • अफ़रोज़ खान

  • कल्पना जैन

  • हेमलता जैन

ईओडब्ल्यू अब डिजिटल फॉरेंसिक रिकॉर्ड, लेनदेन डेटा और आंतरिक कंप्यूटर लॉग्स की विस्तृत जांच कर रहा है।


बैंकिंग सुरक्षा पर उठे सवाल

यह घटना राष्ट्रीयकृत बैंकों में निष्क्रिय खातों की सुरक्षा और आंतरिक मॉनिटरिंग सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि डॉर्मेंट अकाउंट सबसे अधिक जोखिम वाले होते हैं क्योंकि ग्राहक लंबे समय तक गतिविधि नहीं करते, जिससे कर्मचारी अनियमितताएं आसानी से छिपा सकते हैं।