आरबीआई एमपीसी बैठक जून 2026: संजय मल्होत्रा पैनल ने महंगाई के जोखिमों पर किया विचार
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक शुरू हो गई है। वैश्विक तनाव के बीच ब्याज दरों और महंगाई पर अहम फैसला जल्द आने...
मुख्य सारांश:
• क्या हुआ: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने प्रमुख ब्याज दरों पर फैसला लेने के लिए अपनी तीन दिवसीय जून बैठक शुरू कर दी है।
• यह क्यों महत्वपूर्ण है: बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और उतार-चढ़ाव वाली ऊर्जा लागत घरेलू महंगाई और आर्थिक विकास के लिए खतरा बनी हुई है।
• क्या बदलाव होंगे: ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने की व्यापक संभावना है, जिससे वर्तमान यथास्थिति बनी रहेगी।
• कौन प्रभावित होगा: उपभोक्ता, वित्तीय बाजार और कर्ज की लागत पर नजर रखने वाले उद्योग इस फैसले की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।
एमपीसी ने तीन दिवसीय नीति समीक्षा शुरू की
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार, 3 जून 2026 को अपनी तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक शुरू कर दी है। बाजार विशेषज्ञों को व्यापक रूप से उम्मीद है कि जब आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 5 जून 2026 को अंतिम फैसले की घोषणा करेंगे, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को यथावत रख सकता है।
हालांकि प्रमुख दरों में यथास्थिति बनाए रखने की पूरी संभावना है, लेकिन निवेशकों का मुख्य ध्यान गवर्नर के बयान पर रहेगा। बाजार भविष्य के नीतिगत कदमों, घरेलू विकास के नए अनुमानों और संशोधित महंगाई अनुमानों के बारे में महत्वपूर्ण संकेतों की तलाश कर रहा है।
वैश्विक चुनौतियों से भारत के महंगाई परिदृश्य पर संकट
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव पैदा कर दिया है। चूंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, इसलिए ऊर्जा की लगातार ऊंची कीमतें आयातित महंगाई को बढ़ाने और चालू खाता घाटे को चौड़ा करने का जोखिम पैदा करती हैं।
भले ही घरेलू आर्थिक गतिविधियां काफी मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन खुदरा महंगाई अभी भी बाहरी आपूर्ति झटकों के प्रति संवेदनशील है। ईंधन की ऊंची कीमतों से परिवहन, विनिर्माण और खाद्य कीमतों सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर बुरा असर पड़ने का खतरा है।
केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की एक रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य से कम मानसून की आशंका, ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और थोक महंगाई का खुदरा कीमतों पर असर पड़ने के कारण महंगाई का दबाव और तेज हो रहा है।
वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ और महंगाई का अनुमान
रेटिंग एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर विभिन्न आर्थिक अनुमान पेश किए हैं:
- केयरएज रेटिंग्स (सामान्य स्थिति): यदि कच्चे तेल की कीमतें औसतन 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती हैं, तो जीडीपी ग्रोथ 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- केयरएज रेटिंग्स (वैकल्पिक स्थिति): यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाता है, तो विकास दर घटकर 6 प्रतिशत तक आ सकती है।
- एसबीआई रिसर्च: वित्त वर्ष 2027 के लिए घरेलू जीडीपी विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
- एसबीआई का महंगाई परिदृश्य: वैश्विक कमोडिटी दबावों के कारण कई तिमाहियों तक उपभोक्ता महंगाई 5 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है।
आगे किस पर रहेगी नजर
बाजार के भागीदार घरेलू नकदी (लिक्विडिटी) की स्थिति, कर्ज की वृद्धि और पिछले नीतिगत कदमों के असर पर आरबीआई के आकलन की बारीकी से निगरानी करेंगे। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक के महंगाई अनुमानों या नीतिगत दिशा-निर्देशों में कोई भी बदलाव आगामी ब्याज दरों में कटौती के सटीक समय को तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
