भोपाल पॉटर्स मार्केट 2025 की भव्य शुरुआत: गौहर महल में देश–विदेश के समकालीन सेरामिक कलाकारों की रचनात्मक दुनिया प्रदर्शित
भोपाल के ऐतिहासिक गौहर महल में चार दिवसीय Bhopal Potters Market 2025 की शुरुआत हो गई है, जहां भारत और विदेश के चुनिंदा समकालीन सेरामिक...

भोपाल के ऐतिहासिक गौहर महल में चार दिवसीय Bhopal Potters Market 2025 की शुरुआत हो गई है, जहां भारत और विदेश के चुनिंदा समकालीन सेरामिक कलाकार अपनी प्रयोगधर्मी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कृतियों के साथ दर्शकों को एक नई कलात्मक भाषा से रूबरू करा रहे हैं। यह इवेंट न केवल मध्य प्रदेश की कला विरासत को वैश्विक संवाद से जोड़ता है, बल्कि देश में आधुनिक सेरामिक कला की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रमाण है।
रख्खी केन: आदिवासी देव-परंपराओं से प्रेरित टोटम पोल
ऑरोविल, पुडुचेरी की प्रख्यात कलाकार रख्खी केन इस वर्ष के प्रमुख आकर्षणों में से एक हैं। उन्होंने सोडा फायर और वुड फायर तकनीक से तैयार किए गए बड़े पैमाने के इंस्टॉलेशन और फॉर्म प्रस्तुत किए हैं।
रख्खी ने बताया कि 1993 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन, वडोदरा में अध्ययन के दौरान उनकी मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदायों से पहली मुलाकात हुई थी। इसी जुड़ाव ने उनके प्रसिद्ध टोटम पोल्स को जन्म दिया, जिनमें प्रदेश की जनजातीय आस्था, प्रकृति और लोक-अनुभव की छाप साफ दिखाई देती है।
कला विशेषज्ञों का मानना है कि रख्खी का काम भारतीय सेरामिक कला को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है, क्योंकि वह परंपरा को आधुनिक तकनीकी प्रक्रिया के साथ जोड़ती हैं और मिट्टी के माध्यम से यात्राओं, स्मृतियों और आध्यात्मिक अनुभवों को व्यक्त करती हैं।
फाल्गुनी भट्ट: संवेदनाओं, अस्मिता और विचारों का सेरामिक संसार
कोलकाता की समकालीन कलाकार फाल्गुनी भट्ट ने अपने नवीनतम कार्यों में मानसिक अवस्थाओं, सामाजिक धारणाओं और दैनिक परिवेश के प्रति संवेदनशील प्रतिक्रिया को सेरामिक माध्यम में रूपांतरित किया है।
उनकी कृतियां रूढ़ियों को तोड़ने, आत्ममंथन और व्यक्तिगत अनुभवों के भीतर छिपी परतों को उजागर करने का प्रयास करती हैं। कला समीक्षकों का कहना है कि फाल्गुनी का काम भारतीय महिला कलाकारों की बदलती अभिव्यक्ति का प्रतीक है, जहां व्यक्तिगत भावनाएं और सामाजिक यथार्थ एक साथ आकार लेते हैं।
एलोडी और रेयाज़: हिमाचल की घाटियों से अंतरराष्ट्रीय सेरामिक संवाद
हिमाचल प्रदेश स्थित Atelier Lālmitti क्ले स्टूडियो से जुड़े कलाकार एलोडी और रेयाज़ ने भी अपनी विशिष्ट कला-भाषा को प्रदर्शित किया। दोनों मिलकर स्टूडियो में काम करते हैं, लेकिन अपनी-अपनी स्वतंत्र कला साधना भी निभाते हैं।
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रेयाज़ एक प्रतिष्ठित भारतीय सेरामिक कलाकार और शिक्षक हैं, जो कई राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और रेजिडेंसियों में भाग ले चुके हैं।
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एलोडी, फ्रांस में जन्मीं, कार्डिफ स्कूल ऑफ आर्ट एंड डिज़ाइन (यूके) से BA और MA कर चुकी हैं और सेरामिक व ड्रॉइंग में विशेष दक्षता रखती हैं।
उनकी संयुक्त और व्यक्तिगत कलाकृतियों में हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य, अंतर-सांस्कृतिक अनुभव और शिल्प कौशल की परिष्कृतता का अनूठा मेल देखने को मिला।
भोपाल के लिए यह आयोजन क्यों महत्वपूर्ण है?
कला विशेषज्ञों का मानना है कि Bhopal Potters Market मध्य भारत में समकालीन सेरामिक्स की पहचान मजबूत करने में बेहद अहम भूमिका निभाता है।
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यह कार्यक्रम स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराता है।
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पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
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परंपरागत मिट्टी कला को आधुनिक प्रयोगों से जोड़कर नई पीढ़ी को प्रेरित करता है।
मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की कला विरासत को व्यापक सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा बनाते हैं और युवाओं को हस्तशिल्प, डिजाइन और समकालीन कला जैसे क्षेत्रों से जोड़ने में मदद करते हैं।
