झाबुआ पटवारी लोकायुक्त के जाल से भागा, फिर भी ₹20,000 रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज
झाबुआ के पटवारी संदीप पंवार ने ₹20,000 की रिश्वत मांगते हुए लोकायुक्त के जाल से बचने में कामयाबी हासिल की, लेकिन उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण...

शीर्ष सारांश
- क्या हुआ: इंदौर लोकायुक्त टीम ने झाबुआ पटवारी संदीप पंवार को ₹20,000 की रिश्वत मांगते हुए रंगे हाथों पकड़ने की कोशिश की, लेकिन सतर्क होने पर वह गिरफ्तारी से बच निकला।
- यह क्यों मायने रखता है: यह घटना सार्वजनिक सेवाओं में लगातार भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करती है, भले ही वे लगन से प्रयास कर रही हों।
- क्या बदला: पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक औपचारिक मामला दर्ज किया गया है, जिससे रंगे हाथों गिरफ्तारी के बिना भी कानूनी कार्यवाही शुरू हो गई है।
- कौन प्रभावित है: आवेदक देवा मेड़ा, जिसने भूमि रिकॉर्ड अपडेट करने की मांग की थी, और पटवारी संदीप पंवार, जो अब गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहा है।
झाबुआ में पटवारी भ्रष्टाचार विरोधी जाल से बच निकला
इंदौर, 26 जून, 2026: इंदौर से लोकायुक्त टीम एक भ्रष्ट पटवारी को गिरफ्तार करने के इरादे से झाबुआ पहुंची थी। जाल बिछाने और घंटों सादे कपड़ों में इंतजार करने के बाद, रिश्वत मांगने वाला पटवारी, संदीप पंवार, मौके पर नहीं आया।
माना जा रहा है कि उसे लोकायुक्त की मौजूदगी के बारे में भनक लग गई थी। भौतिक जाल विफल होने के बावजूद, उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
₹20,000 की रिश्वत की मांग
यह मामला झाबुआ की राणापुर तहसील के सुरदिया गांव निवासी श्री देवा मेड़ा (34) की शिकायत से शुरू हुआ। मेड़ा के चाचा का निधन हो गया था, जिसके कारण उनकी कृषि भूमि के रिकॉर्ड (खसरा खतौनी) को अपडेट करना आवश्यक था।
मेड़ा ने इस अपडेट के लिए अपने स्थानीय पटवारी, श्री संदीप पंवार, पटवारी, पी.एच. नंबर 06, सुरदिया गांव, राणापुर तहसील, झाबुआ से संपर्क किया। पंवार ने कथित तौर पर इस आधिकारिक कर्तव्य को पूरा करने के लिए ₹20,000 की रिश्वत की मांग की।
लोकायुक्त ने जुटाए सबूत और बनाई जाल टीम
इसके बाद देवा मेड़ा ने इंदौर स्थित लोकायुक्त कार्यालय में पुलिस अधीक्षक श्री राजेश सहाय के पास शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त कार्यालय ने मेड़ा और पंवार के बीच एक और बातचीत की व्यवस्था करके शिकायत का सत्यापन किया।
इस बातचीत को रिकॉर्ड किया गया, जिसमें पंवार की रिश्वत की मांग और भुगतान न होने पर रिकॉर्ड अपडेट न करने की धमकी भी दर्ज हुई। इस ऑडियो साक्ष्य के आधार पर पटवारी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक जाल टीम का गठन किया गया।
पटवारी लोकायुक्त अभियान से बच निकला
कार्यवाहक निरीक्षक श्री सचिन पटेरिया और आरक्षकों सहित जाल टीम ने शिकायतकर्ता को रासायनिक रूप से उपचारित नोट दिए। इसके बाद वे पटवारी संदीप पंवार को पकड़ने के लिए सहमत समय पर निर्धारित स्थान पर पहुंचे।
हालांकि, पंवार का नेटवर्क मजबूत साबित हुआ। कथित तौर पर उसे क्षेत्र में लोकायुक्त की उपस्थिति के बारे में पता चल गया, उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया, और एक अज्ञात स्थान पर गायब हो गया, जिससे वह सफलतापूर्वक जाल से बच निकला।
गिरफ्तारी से बचने के बावजूद भ्रष्टाचार का मामला दर्ज
एक बार जब लोकायुक्त टीम को यकीन हो गया कि पटवारी संदीप पंवार नहीं आएगा, तो उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भ्रष्टाचार के मामलों में रंगे हाथों गिरफ्तारी ही अपराध का एकमात्र निर्धारक नहीं है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत, रिश्वत की मांग, जिसे ऑडियो रिकॉर्डिंग और एक स्वतंत्र गवाह द्वारा पुष्टि की जाती है, अक्सर अभियोजन के लिए पर्याप्त होती है। इस मामले में, किसान की गवाही, पूरे लोकायुक्त प्रणाली के साथ, एक गवाह के रूप में कार्य करती है।
आगे क्या देखना है
पटवारी संदीप पंवार के खिलाफ जांच जारी रहेगी, जिसका मुख्य ध्यान उसकी गिरफ्तारी और आगे के सबूत जुटाने पर रहेगा। भविष्य की कानूनी कार्यवाही भ्रष्टाचार के आरोपों के परिणाम का निर्धारण करेगी, यह दर्शाते हुए कि गिरफ्तारी से बचना किसी आरोपी को न्याय का सामना करने से बरी नहीं करता है।
