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क्या दिल्ली ब्लास्ट के पीछे जैश-ए-मोहम्मद? खुफिया एजेंसियों को हवाला फंडिंग का 20 लाख रुपये का सुराग मिला

लीड दिल्ली के लाल किले के सामने हुए घातक कार विस्फोट की जांच अब अंतरराष्ट्रीय आतंकी फंडिंग की दिशा में मुड़ गई है। खुफिया एजेंसियों...

Nov 16
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क्या दिल्ली ब्लास्ट के पीछे जैश-ए-मोहम्मद? खुफिया एजेंसियों को हवाला फंडिंग का 20 लाख रुपये का सुराग मिला

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दिल्ली के लाल किले के सामने हुए घातक कार विस्फोट की जांच अब अंतरराष्ट्रीय आतंकी फंडिंग की दिशा में मुड़ गई है। खुफिया एजेंसियों ने शुरुआती इनपुट में दावा किया है कि यह हमला जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क द्वारा हवाला चैनलों के ज़रिए वित्तपोषित किया गया था, और साजिश में शामिल तीन संदिग्ध डॉक्टरों को पाकिस्तान से 20 लाख रुपये भेजे गए थे।


जैश नेटवर्क का शक, तीन डॉक्टरों पर एजेंसियों की नजर

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के एक हैंडलर ने भारत में हमले की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कथित तौर पर 20 लाख रुपये भेजे। यह रकम हवाला नेटवर्क से होकर उमर, मुजम्मिल और शाहीन — तीनों संदिग्ध डॉक्टरों — तक पहुंची।

जांचकर्ताओं के अनुसार, इन तीनों ने मिलकर विस्फोट की तैयारी की, जिसमें डॉ. मुजम्मिल को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।


NPK केमिकल की बड़ी खरीद: विस्फोटक सामग्री की ओर संकेत

एजेंसियों को मिले दस्तावेज बताते हैं कि भेजी गई रकम में से 3 लाख रुपये का उपयोग 26 क्विंटल NPK (नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटाश) केमिकल खरीदने में किया गया।
यह केमिकल सामान्यतः कृषि में उर्वरक के रूप में इस्तेमाल होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके कुछ संयोजन विस्फोटक बनाने के लिए भी उपयोग किए जा सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, बाकी रकम के बंटवारे पर शाहीन और उमर के बीच विवाद भी हुआ था।


कारतूस बरामद, हथियार गायब — जांच और गहरी हुई

दिल्ली पुलिस ने भी पुष्टि की है कि घटना स्थल से 9mm कैलिबर के तीन कारतूस बरामद हुए हैं, जिनमें दो लाइव और एक खाली शेल था। यह गोला-बारूद आमतौर पर सुरक्षा बलों या विशेष अनुमति प्राप्त व्यक्तियों द्वारा ही उपयोग किया जाता है।

हालांकि, मौके से कोई हथियार नहीं मिला, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि गोली चलाने के लिए इस्तेमाल की गई पिस्तौल हमलावर घटना से पहले या बाद में कहीं और ले गया होगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “कारतूसों की मौजूदगी और हथियार का न मिलना, दोनों मिलकर साजिश की जटिलता को और बढ़ाते हैं।”


14 साल बाद इतना बड़ा धमाका — राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा सवाल

लाल किले के पास यह विस्फोट देश की राजधानी में लगभग 14 साल बाद हुआ सबसे बड़ा हमला था।
इस घटना में 12 लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए।

यह इलाका ऐतिहासिक महत्व, उच्च मात्रा में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही तथा संवेदनशील सुरक्षा परिधि के कारण हमेशा हाई-प्रायोरिटी ज़ोन माना जाता है। ऐसे में एक विस्फोटक-लदी कार का यहां तक पहुंच जाना सुरक्षा ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


फोरेंसिक जांच और CCTV विश्लेषण तेज

पुलिस अब उस चैन को समझने की कोशिश कर रही है जिसके ज़रिए NPK केमिकल जुटाया गया, हवाला नेटवर्क सक्रिय हुआ और कारतूस दिल्ली तक पहुंचे।
फोरेंसिक टीमें मौके से मिले विस्फोटक अवशेष और धातु के टुकड़ों की जांच कर रही हैं, जबकि दर्जनों CCTV कैमरों से संदिग्धों की गतिविधि जोड़ने की कोशिश जारी है।

एक अधिकारी के मुताबिक, “जांच बहु-स्तरीय है — फंडिंग, विस्फोटक सोर्सिंग, और आंदोलन की कड़ियां हमें एक बड़े नेटवर्क की ओर संकेत दे रही हैं।”


सोशल मीडिया सार (2–3 वाक्य)

दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट में अब हवाला नेटवर्क और जैश-ए-मोहम्मद की फंडिंग का शक गहराया है। खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि तीन संदिग्ध डॉक्टरों को पाकिस्तान से 20 लाख रुपये भेजे गए थे। पुलिस को मौके से 9mm कारतूस भी मिले, जबकि पिस्तौल अब तक गायब है।