भोपाल की महिला डीएसपी पर ₹2 लाख चोरी का आरोप, सीसीटीवी में कैद हुई करतूत – पुलिस अधिकारी फरार
भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में महिला पुलिस अधिकारी पर चोरी का गंभीर आरोप लगा है। डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) कल्पना रघुवंशी पर अपनी ही...

भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में महिला पुलिस अधिकारी पर चोरी का गंभीर आरोप लगा है। डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) कल्पना रघुवंशी पर अपनी ही पुरानी मित्र के घर से ₹2 लाख नकद और एक मोबाइल फोन चुराने का आरोप है। शिकायतकर्ता के घर लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी घटना रिकॉर्ड होने के बाद मामला सामने आया।
दोस्ती से धोखाधड़ी तक: कैसे खुली चोरी की पोल
जहांगीराबाद निवासी प्रमिला (परिवर्तित नाम) और डीएसपी कल्पना रघुवंशी कई वर्षों से मित्र थीं। प्रमिला ने हाल ही में अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करने के लिए ₹2 लाख रुपये बैंक से निकाले और उन्हें घर में सुरक्षित रख दिया था। कुछ देर बाद जब वह स्नान कर लौटीं, तो पैसे और मोबाइल दोनों गायब थे।
पहले तो प्रमिला को शक हुआ कि घर में कोई बाहर का व्यक्ति घुसा होगा, लेकिन जब उन्होंने सीसीटीवी फुटेज चेक किया, तो वे हैरान रह गईं। वीडियो में डीएसपी रघुवंशी खुद घर में दाखिल होकर बैग उठाते और बाहर निकलते हुए दिखाई दीं।
सबूत मिलने पर दर्ज हुई एफआईआर, अधिकारी फरार
प्रमिला ने तत्काल स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई और फुटेज पुलिस को सौंपी। जांच के बाद फुटेज की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर डीएसपी के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया गया।
जहांगीराबाद थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस ने जब आरोपी अधिकारी के घर पर छापा मारा, तो वहां से शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन बरामद हुआ। हालांकि, चोरी किए गए ₹2 लाख रुपये अब तक नहीं मिले हैं।
पुलिस विभाग में हलचल, अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
इस घटना ने पुलिस विभाग में भी हलचल मचा दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “यदि किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ऐसे आरोप साबित होते हैं, तो यह पूरी पुलिस व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा करता है।”
पुलिस ने डीएसपी रघुवंशी की तलाश तेज कर दी है। भोपाल के एसीपी बिट्टू शर्मा ने आज तक से बातचीत में कहा कि आरोपी अधिकारी फिलहाल फरार हैं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भरोसे पर लगा दाग
यह मामला न केवल एक आपराधिक घटना है, बल्कि पुलिस सेवा की नैतिकता और विश्वास पर भी गहरा आघात है। जिस पद से नागरिकों की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद की जाती है, उसी पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा आचरण पुलिस तंत्र की छवि को नुकसान पहुंचाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं, ताकि जनता का भरोसा बहाल हो सके।
निष्कर्ष
भोपाल पुलिस अब आरोपी डीएसपी की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर रही है। विभागीय जांच भी शुरू की गई है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि कानून के रक्षक भी यदि मर्यादा तोड़ते हैं, तो कानून उनसे भी उतनी ही कठोरता से पेश आता है।
