मुख्यमंत्री मोहन यादव की समीक्षा बैठक: ‘भावांतर’ और ‘लाड़ली बहना’ योजनाओं के लिए वित्त विभाग को ₹1,850 करोड़ जुटाने के निर्देश
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को ‘भावांतर योजना’ और ‘लाड़ली बहना योजना’ की समीक्षा बैठक ली। बैठक में वित्त विभाग को...
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को ‘भावांतर योजना’ और ‘लाड़ली बहना योजना’ की समीक्षा बैठक ली। बैठक में वित्त विभाग को दोनों योजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसानों को किसी भी स्थिति में नुकसान या असंतोष नहीं होना चाहिए।
लाड़ली बहना योजना के लिए ₹1,850 करोड़ की जरूरत
बैठक में बताया गया कि लाड़ली बहना योजना के आगामी भुगतान के लिए राज्य सरकार को लगभग ₹1,850 करोड़ की अतिरिक्त राशि की आवश्यकता है। वित्त विभाग को यह राशि शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है ताकि पात्र महिलाओं को समय पर लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि “इस योजना में किसी भी तरह की देरी या भुगतान में बाधा नहीं आनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे जनता की भावनाओं से जुड़ी योजना है।”
भावांतर योजना के लिए मॉडल रेट तय होंगे शुक्रवार को
बैठक में भावांतर भुगतान योजना से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह योजना किसानों को उनकी उपज के दाम में होने वाले अंतर की भरपाई सुनिश्चित करती है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को कृषि उपज मंडियों में किसानों द्वारा किए जा रहे वास्तविक विक्रय मूल्यों के आधार पर मॉडल रेट तय किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मॉडल रेट तय करते समय किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि मूल्य निर्धारण के बाद किसी तरह की असंतोष की स्थिति न बने।
कैसे काम करती है भावांतर योजना
योजना के तहत सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,328 प्रति क्विंटल निर्धारित है।
यदि मॉडल रेट तय होने के बाद किसान अपनी उपज इससे कम मूल्य पर बेचते हैं, तो सरकार उन्हें मॉडल रेट और विक्रय मूल्य के बीच का अंतर भावांतर राशि के रूप में देगी।
वहीं, अगर किसान उपज को मॉडल रेट से अधिक मूल्य पर बेचते हैं, तब भी उन्हें MSP और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई सरकार करेगी।
हालांकि, कई किसान मॉडल रेट तय होने से पहले ही सोयाबीन बेच रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने चिंता जताई और अधिकारियों को कहा कि किसानों को योजना की प्रक्रिया और लाभों की पूरी जानकारी दी जाए।
किसानों की नाराज़गी न हो, सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट कहा कि भावांतर राशि तय होने के बाद किसानों में किसी भी तरह की नाराज़गी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कृषि विभाग और विपणन अधिकारियों को निर्देश दिए कि पारदर्शिता और जागरूकता दोनों पर समान ध्यान दिया जाए।
पृष्ठभूमि और महत्व
‘भावांतर योजना’ मध्य प्रदेश सरकार की एक प्रमुख किसान कल्याण योजना है, जिसका उद्देश्य बाजार में गिरते दामों से किसानों को राहत देना है। वहीं, ‘लाड़ली बहना योजना’ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा आधार बन चुकी है, जिससे लाखों महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता मिल रही है।
दोनों योजनाएँ मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं, क्योंकि ये सीधे ग्रामीण और कृषक वर्ग को प्रभावित करती हैं।
