17 राज्यों में फैला साइबर ठगी का जाल, देवास पुलिस ने 12 ठगों को दबोचा
देवास पुलिस ने 'ई-जीरो FIR' के तहत डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। 17 राज्यों में 127 दिन चली कार्रवाई में 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार कर 54 लाख से अधिक की ठगी गई राशि बरामद की गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 23 अगस्त 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश में साइबर अपराधों पर नियंत्रण और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए 'ई-जीरो FIR' व्यवस्था के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए साईं मनोहर के नेतृत्व में देवास पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड' के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे लगभग 54 लाख 84 हजार 725 रुपये की ठगी गई राशि बरामद हुई है।
यह मामला तब सामने आया जब देवास के थाना कोतवाली क्षेत्र के एक नागरिक ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 63 लाख 52 हजार रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर देवास पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की। इस टीम ने ठगी गई राशि के बैंकिंग ट्रांजेक्शन, खाताधारकों, मोबाइल नंबरों, बैंक स्टेटमेंट, बैंक शाखाओं के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया। प्रत्येक बैंकिंग लेयर का गहन तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण करने के बाद पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
अंतरराज्यीय कार्रवाई का विस्तृत ताना-बाना
ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन का लगातार पीछा करते हुए, देवास पुलिस की 19 टीमों में शामिल 70 पुलिसकर्मियों ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित कुल 17 राज्यों के 33 जिलों में स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करते हुए संदिग्ध खाताधारकों और आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी।
इस व्यापक अंतरराज्यीय कार्रवाई के दौरान, पुलिस टीमों ने लगातार 127 दिनों तक आरोपियों की तलाश, बैंक खातों की जांच, बैंक शाखाओं से तकनीकी साक्ष्य जुटाने और संदिग्धों की गतिविधियों के सत्यापन में महत्वपूर्ण समय बिताया। इस दौरान टीमों ने लगभग 58 हजार 315 किलोमीटर की दूरी तय की। विभिन्न राज्यों में की गई समन्वित कार्रवाई के परिणामस्वरूप, इस साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार ठगों की कार्यप्रणाली का खुलासा
जांच में यह बात सामने आई है कि साइबर ठग पीड़ितों को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच या सीबीआई का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते थे। वे पीड़ितों को मनी लॉन्ड्रिंग के एक प्रकरण में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर फर्जी जांच प्रक्रिया संचालित करते थे। इस प्रक्रिया के दौरान, वे न्यायालय जैसी परिस्थितियां निर्मित कर पीड़ित से उनकी बैंकिंग और निवेश संबंधी जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद, जांच के नाम पर पीड़ित को विभिन्न बैंक खातों में राशि जमा कराने के लिए मजबूर किया जाता था, जिसे बाद में अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था।
पुलिस ने बैंकिंग चैनल की विभिन्न कड़ियों को ट्रेस करते हुए इस नेटवर्क से जुड़े खातों और आरोपियों तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। इस कार्रवाई के दौरान, लगभग 54 लाख 84 हजार रुपये की ठगी गई राशि बरामद की गई। इसके अतिरिक्त, आरोपियों के पास से बैंकिंग और डिजिटल लेन-देन से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री भी जब्त की गई है, जो आगे की जांच में सहायक होगी।
नागरिकों के लिए 'डिजिटल अरेस्ट' से बचाव की अपील
मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई भी वैधानिक प्रक्रिया वास्तव में मौजूद नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क करता है, गिरफ्तारी का भय दिखाता है, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य अपराध में फंसाने की धमकी देता है, या जांच के नाम पर आपसे पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है, तो घबराएं नहीं और किसी भी दशा में किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर न करें।
साइबर ठगी की किसी भी स्थिति में, नागरिकों को तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए या अपने निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करना चाहिए। समय पर की गई शिकायत न केवल ठगी गई राशि को सुरक्षित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, बल्कि अपराधियों तक पहुंचने और उन्हें गिरफ्तार करने में भी सहायक सिद्ध होती है।
