17 अगस्त से मघा नक्षत्र में प्रवेश, 31 अगस्त तक अच्छी बारिश की उम्मीद
ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के अनुसार, 17 अगस्त से मघा नक्षत्र में वर्षा का प्रवेश होगा, जो 31 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में अच्छी वर्षा और जलस्रोतों में वृद्धि के योग हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 16 अगस्त 2026
ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सोमवार, 17 अगस्त से वर्षा अपने पांचवें नक्षत्र मघा में प्रवेश करेगी। यह अवधि 31 अगस्त तक प्रभावी रहेगी, जिसके दौरान प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों में बारिश के विभिन्न रूप देखने की संभावना जताई गई है।
ज्योतिषाचार्य एवं भविष्यवक्ता पंडित विनोद गौतम ने बताया कि 17 अगस्त को वर्षा का सिंह राशि के मघा नक्षत्र में प्रवेश होगा। ज्योतिषीय योग-संयोगों के आधार पर इस दौरान स्त्री-स्त्री कारक योग के साथ सूर्य-चंद्र योग भी बनने की स्थिति है। वर्षा के वाहन के रूप में चातक (पपीहा) का उल्लेख किया गया है, जबकि नक्षत्र के अधिपति तथा वर्षा के स्वामी मंगल के प्रभाव से खंड-वृष्टि के योग भी बनते हैं।
‘मघा देगा अघा’ कहावत से अच्छी वर्षा का संकेत
पंडित गौतम के अनुसार, मघा नक्षत्र में वर्षा का प्रवेश पांचवें दौर की बारिश का संकेत माना जाता है। लोक मान्यता में यह कहावत प्रचलित है कि “मघा देगा अघा”, जिसका अर्थ है कि इस नक्षत्र के दौरान ताल-तलैया और जलस्रोत पर्याप्त पानी से भर जाते हैं। इस अवधि में उन क्षेत्रों में भी बारिश होने की संभावना है, जहां पहले अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई हो।
उन्होंने मघा नक्षत्र से जुड़ी एक अन्य लोक कहावत “मघा न बरसे भरे न खेत, माता न परसे भरे न पेट” का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार यह कहावत भी सार्थक होती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार मघा नक्षत्र की प्रकृति व्यापक क्षेत्र में वर्षा के प्रभाव को दर्शाती है, जिससे कृषि और जलस्रोतों के लिए पर्याप्त पानी मिलने के योग बनते हैं।
ग्रहणों का प्राकृतिक घटनाओं से संबंध
पंडित विनोद गौतम ने आगामी खगोलीय घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 12 अगस्त को खग्रास सूर्य ग्रहण हुआ था, जो विदेशों में दिखाई दिया। ज्योतिषीय दृष्टि से इसके प्रभावों को प्राकृतिक घटनाओं से जोड़ा जाता है।
उन्होंने बताया कि आगामी 28 अगस्त को पूर्ण चंद्र ग्रहण होने जा रहा है। पंडित गौतम के अनुसार, एक पखवाड़े के भीतर दो ग्रहण पड़ने की स्थिति को ज्योतिषीय परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके मतानुसार, ऐसी स्थितियां प्राकृतिक प्रकोप, भूकंप आदि घटनाओं के संकेत दे सकती हैं, और आगामी चंद्र ग्रहण का प्रभाव विश्व स्तर पर प्राकृतिक घटनाओं के रूप में देखा जा सकता है।
पंडित गौतम ने पुनः दोहराया कि मघा नक्षत्र 31 अगस्त तक प्रभावी रहेगा और इस अवधि में होने वाली वर्षा से जलस्रोतों में जलस्तर बढ़ने तथा कृषि क्षेत्र को लाभ मिलने की प्रबल संभावना है।
