“वंदे मातरम् के 150 वर्ष: मध्य प्रदेश में 7 से 26 नवम्बर तक राज्यव्यापी उत्सव, सीएम मोहन यादव भोपाल से करेंगे शुभारंभ”
भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मध्य प्रदेश में 7 नवम्बर से 26 नवम्बर तक विशेष राज्यव्यापी...

भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मध्य प्रदेश में 7 नवम्बर से 26 नवम्बर तक विशेष राज्यव्यापी समारोहों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई में भोपाल के सौर्य स्मारक से इस अभियान की शुरुआत होगी, जबकि राज्य के सभी मंत्री और जनप्रतिनिधि अलग-अलग जिलों में कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
इतिहास से आज तक: वंदे मातरम् की 150 साल की गूंज
1870 के दशक में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित और 1882 में प्रकाशित वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बन गया था। यह गीत उनकी प्रसिद्ध कृति आनंद मठ का हिस्सा है, जिसने देशभक्ति की भावना को नए शिखर पर पहुँचाया। आज, 150 वर्ष बाद, मध्य प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसे केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक के रूप में पुनः जीवित कर रही है।
राज्यभर में समारोह: मंत्री संभालेंगे नेतृत्व
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि पार्टी और राज्य सरकार केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार इस आयोजन को व्यापक रूप में मना रही है।
7 नवम्बर से 26 नवम्बर तक वंदे मातरम् का सामूहिक गायन राज्य के सभी जिलों, स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल में सौर्य स्मारक पर मुख्य कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे। उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला रीवा में, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह जबलपुर में, परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह नर्मदापुरम में, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर में, खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत सागर में, लघु उद्योग राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल शहडोल में और कौशल विकास राज्यमंत्री गौतम टेटवाल उज्जैन में कार्यक्रमों का संचालन करेंगे।
ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष आयोजन
खंडेलवाल के अनुसार, इन समारोहों के तहत राज्यभर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर विशेष कार्यक्रम होंगे। इनमें राज्य भाजपा कार्यालय (भोपाल), नर्मदा नदी के सेठानी घाट, शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक (मुरैना), रानी लक्ष्मीबाई की वीरभूमि (ग्वालियर), शहीद स्मारक (सागर, रीवा और शहडोल), रघुनाथ शाह व शंकर शाह की शहादत स्थली, देवी अहिल्याबाई स्मारक (इंदौर) और महाकाल लोक (उज्जैन) प्रमुख हैं।
इन सभी स्थानों पर जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता वंदे मातरम् को उसके मूल रूप में गाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान न केवल सांस्कृतिक गौरव का उत्सव है, बल्कि युवाओं में राष्ट्रभक्ति और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास भी है।
इतिहासकारों के अनुसार, वंदे मातरम् ने औपनिवेशिक काल में स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एकजुटता का संदेश दिया था। आज इसे पुनः गाने का निर्णय भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को रेखांकित करता है।
सरकार और भाजपा की साझा पहल
राज्य सरकार और भाजपा संगठन के संयुक्त प्रयास से आयोजित यह कार्यक्रम देशभर में एक बड़ा सांस्कृतिक अभियान बनने जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में 150 स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिनमें से कम से कम दस कार्यक्रम मध्य प्रदेश में होंगे।
निष्कर्ष:
7 से 26 नवम्बर तक चलने वाला यह आयोजन सिर्फ एक गीत के सम्मान का नहीं, बल्कि उस विचार की पुनर्पुष्टि का प्रतीक है जिसने भारत को “वंदे मातरम्” कहने की शक्ति दी।
