आतंकी फंडिंग और अवैध घुसपैठ मामले में ईडी की 13 ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हरियाणा में 13 ठिकानों पर आतंकी फंडिंग और अवैध घुसपैठ के सिलसिले में छापेमारी की...

आतंकी फंडिंग और अवैध घुसपैठ मामले में ईडी की 13 ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आतंकी फंडिंग और अवैध घुसपैठ के एक बड़े मामले में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हरियाणा में एक साथ 13 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर की गई है। ईडी को शक है कि एक संगठित गिरोह रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ कराने, फर्जी पहचान पत्र बनाने और उन्हें भारत में बसाने में लिप्त है।
अवैध घुसपैठ सिंडिकेट का पर्दाफाश
जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से लाया जा रहा है। यह गिरोह इन लोगों के लिए नकली भारतीय पहचान दस्तावेज भी तैयार कर रहा है। इसके अलावा, देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें बसाने में भी इनकी भूमिका बताई जा रही है।
वित्तीय नेटवर्क की जांच
ईडी इस मामले में एक ऐसे वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रहा है, जिसके जरिए इन अवैध गतिविधियों के लिए धन की उगाही की जाती है। एजेंसी कई चैरिटेबल ट्रस्टों और संगठनों पर नजर रख रही है, जिनके बारे में संदेह है कि वे विदेशी फंडिंग प्राप्त करते हैं।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं इन फंडों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों या अन्य अवैध कामों के लिए तो नहीं किया जा रहा है।
कठोर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की रणनीति की जांच
ईडी को छापेमारी के दौरान कई अहम सबूत मिले हैं, जिनमें म्यूल खातों (Mule Accounts) का इस्तेमाल कर फंड ट्रांसफर करना शामिल है। ये खाते अक्सर दूसरों की ओर से पैसे को छिपाने या ले जाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिससे वित्तीय जांच मुश्किल हो जाती है।
एजेंसी नकद निकासी और छोटे, खंडित लेनदेन के जरिए अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों तक धन पहुंचाने की संभावनाओं का भी पता लगा रही है। छापेमारी में मिले दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
जारी जांच और आगे की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया है कि जांच अभी जारी है और बरामद सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क के पूरे पैमाने का पता लगाने और इसमें शामिल सभी व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान करने के लिए काम कर रही हैं।
