कर्नूल बस हादसा: दो 12 केवी बैटरियों के धमाके से भड़की आग, 20 की मौत — स्मार्टफोन्स ने बढ़ाई लपटों की तीव्रता
तेज रफ्तार और दो बैटरियों का विस्फोट बना मौत का कारण आंध्र प्रदेश पुलिस ने शनिवार को बताया कि कर्नूल जिले में शुक्रवार रात हुए...

तेज रफ्तार और दो बैटरियों का विस्फोट बना मौत का कारण
आंध्र प्रदेश पुलिस ने शनिवार को बताया कि कर्नूल जिले में शुक्रवार रात हुए बस हादसे में आग लगने की मुख्य वजह बस में लगी दो 12 केवी बैटरियों का विस्फोट थी। इस हादसे में 20 लोगों — 19 यात्रियों और एक बाइक सवार — की मौत हो गई।
प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि बस में रखी सैकड़ों स्मार्टफोन्स की खेप ने आग को और फैलाने में योगदान दिया।
कैसे हुआ हादसा
हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही निजी स्लीपर बस ने रास्ते में एक बाइक को टक्कर मारी, जो वीडियो में लापरवाही से चलते हुए दिखाई दी थी। बाइक बस के नीचे फंस गई और उसका फ्यूल टैंक फट गया। इसी के साथ बस के सामने से ईंधन रिसाव शुरू हुआ, जिससे आग भड़क उठी।
आग तेजी से फैलती चली गई और अंदर रखे लिथियम-आयन बैटरियों वाले 234 स्मार्टफोन्स (लगभग ₹46 लाख मूल्य) ने लपटों की तीव्रता बढ़ा दी।
फॉरेंसिक टीम के अनुसार, आग की गर्मी से बस की एल्यूमिनियम फ्लोरिंग तक पिघल गई, जिससे यात्रियों के बचने की संभावना बेहद कम हो गई।
पुलिस और विशेषज्ञों की रिपोर्ट में अलग-अलग राय
कर्नूल रेंज के डीआईजी कोया प्रवीण ने कहा कि आग का मुख्य कारण बस की दो 12 केवी बैटरियां थीं, न कि स्मार्टफोन खेप।
उन्होंने बताया, “पहला दहन बिंदु बाइक के फ्यूल टैंक से था और दूसरा बस की बैटरी टूलकिट से। जब दोनों में विस्फोट हुआ, तो आग एक झटके में पूरे वाहन में फैल गई।”
डीआईजी प्रवीण ने यह भी कहा कि बस में इस्तेमाल की गई ज्वलनशील सामग्री और मेटैलिक पेंट ने स्थिति और गंभीर बना दी।
दूसरी ओर, फायर सर्विस और फॉरेंसिक विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि स्मार्टफोन की बैटरियां और बस का बैटरी पैक दोनों ही आग फैलाने में जिम्मेदार थे।
डीएनए जांच से होगी पहचान
अधिकारियों ने बताया कि हादसे में कई शव बुरी तरह झुलस गए हैं। डीएनए प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सोमवार तक पीड़ितों की पहचान पूरी होने की संभावना है।
बस में कुल 44 यात्री सवार थे, जिनमें से कुछ ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने में सफलता पाई।
ड्राइवर और सह-चालक हिरासत में
कर्नूल एसपी विक्रांत पाटिल ने बताया कि बस चालक मिरियाला लक्ष्मैया (42) ने हादसे के बाद पैसेंजर डोर से छलांग लगाकर जान बचाई। वह कुछ यात्रियों को बचाने में मदद कर सका, लेकिन जल्द ही डरकर मौके से फरार हो गया।
पुलिस ने उसे शुक्रवार को कर्नूल से गिरफ्तार किया। उस पर लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के आरोप में BNS की धारा 125(ए) और 106(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अतिरिक्त चालक शिवा नारायण, जो उस वक्त नीचे बने विश्राम खंड में सो रहा था, ने कई यात्रियों को बचाने में अहम भूमिका निभाई। उसने टायर रॉड से खिड़कियां तोड़ीं, जिससे कुछ लोग बाहर निकल पाए।
हादसे से पहले बाइक की स्थिति
एसपी पाटिल ने बताया कि बाइक सवार शंकर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका साथी एरी स्वे मामूली रूप से घायल हुआ। हादसे से कुछ मिनट पहले दोनों ने पास के पेट्रोल पंप पर बाइक में ईंधन भरा था।
सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो में दोनों को पंप पर दिखाया गया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि ड्राइवर के शराब सेवन की संभावना की जांच की जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
निष्कर्ष: सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
कर्नूल हादसा न केवल मानवीय त्रासदी है, बल्कि यह निजी परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और बैटरी हैंडलिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों की ढुलाई के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश, बैटरी सुरक्षा निरीक्षण और इमरजेंसी एग्जिट प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाना अब जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे टाले जा सकें।
