डीआर कांगो में इबोला का कहर: लैब टेस्ट के बाद संदिग्ध मामले घटकर हुए 116
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में बड़े पैमाने पर लैब टेस्ट किए जाने के बाद इबोला के संदिग्ध मामलों की संख्या में भारी गिरावट आई है।

मुख्य बिंदु
- क्या हुआ: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने लैब टेस्ट के बाद कई मरीजों में बीमारी खारिज होने पर इबोला के संदिग्ध मामलों की संख्या को घटाकर 116 कर दिया है।
- यह क्यों महत्वपूर्ण है: कई संदिग्ध मरीजों को वास्तव में मलेरिया या मेनिंजाइटिस जैसी अन्य बीमारियां थीं, जिससे इस प्रकोप की वास्तविक स्थिति साफ हुई है।
- लोगों के लिए क्या बदला: सटीक जांच से मरीजों को सही इलाज मिलने में मदद मिल रही है, जबकि 173 संदिग्ध मरीज अभी भी आइसोलेशन में हैं।
- कौन प्रभावित है: डीआर कांगो के मरीज और स्वास्थ्य अधिकारी जो इबोला के 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन से जूझ रहे हैं, जिसका कोई स्वीकृत टीका उपलब्ध नहीं है।
इबोला के संदिग्ध मामलों में भारी गिरावट
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआर कांगो) में जांच के दायरे में चल रहे इबोला के संदिग्ध मामलों में बड़ी कमी दर्ज की गई है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि सक्रिय संदिग्ध मामले तेजी से घटकर 116 रह गए हैं।
मामलों में यह गिरावट स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा मरीजों के बड़े पैमाने पर लैब टेस्ट कराने के बाद आई है। इससे पहले, 27 मई को जारी स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में 26 मई तक 1,077 संदिग्ध मामलों की सूची दी गई थी।
जांच में अन्य बीमारियों का हुआ खुलासा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमीयर ने बताया कि इबोला जैसे लक्षण दिखाने वाले किसी भी व्यक्ति को शुरू में संदिग्ध मामला माना जाता है। ऐसा सक्रिय निगरानी के दौरान या क्लीनिकों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के मामले में किया जाता है।
‘प्रयोगशाला परीक्षणों के बाद, इनमें से कई मामलों में इबोला की पुष्टि नहीं हुई। कुछ मरीजों में मलेरिया, मेनिंजाइटिस या अन्य असंबंधित बीमारियां पाई गईं,’ लिंडमीयर ने कहा।
इबोला की आशंका खारिज होने के बाद, चिकित्सा टीमें अब अन्य गंभीर बीमारियों का सटीक इलाज करने में सक्षम हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में इबोला वायरस अभी भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है।
मौत के आंकड़े और मरीजों के ठीक होने की दर
स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा अपडेट के अनुसार, डीआर कांगो में इबोला के 340 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इस प्रकोप के कारण अब तक 60 लोगों की मौत हो चुकी है।
राहत की बात यह है कि कुल छह मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, जो पिछले दिन की तुलना में एक अधिक है। वर्तमान में, 173 संदिग्ध मरीज अभी भी आइसोलेशन में रखे गए हैं। डब्ल्यूएचओ ने 17 मई को ही डीआर कांगो में इस इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था।
'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन का घातक खतरा
स्वास्थ्य अधिकारी इस वायरस के एक बेहद चुनौतीपूर्ण वेरिएंट का सामना कर रहे हैं। वर्तमान प्रकोप मुख्य रूप से इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन के कारण फैला है।
यह खास स्ट्रेन चिकित्सा विज्ञान के सामने अनोखी चुनौतियां पेश कर रहा है। वर्तमान में इस वेरिएंट से निपटने के लिए कोई भी स्वीकृत टीका या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है।
आगे क्या होने वाला है
विशेषज्ञों की नजर इस बात पर होगी कि क्या स्वास्थ्य कर्मी आइसोलेशन में रह रहे 173 संदिग्ध मरीजों की जांच जल्द पूरी कर पाते हैं। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के प्रसार को रोकने पर भी ध्यान केंद्रित रहेगा क्योंकि डब्ल्यूएचओ अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया का संचालन कर रहा है।
इसके साथ ही, स्वास्थ्य एजेंसियों को इस सक्रिय स्ट्रेन के लिए स्वीकृत टीके या इलाज की अनुपलब्धता की बड़ी चुनौती से भी पार पाना होगा।
