दीपावली के बाद भोपाल में जमा हुआ 1,100 टन कचरा, 20 टन पटाखा अवशेष अलग से किया गया वैज्ञानिक निपटान की तैयारी
दीपावली के बाद बढ़ा कचरे का बोझ दीपावली के बाद भोपाल नगर निगम (BMC) ने शहरभर से 1,100 टन से अधिक ठोस कचरा एकत्र किया...

दीपावली के बाद बढ़ा कचरे का बोझ
दीपावली के बाद भोपाल नगर निगम (BMC) ने शहरभर से 1,100 टन से अधिक ठोस कचरा एकत्र किया — यह सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 300 टन अधिक था। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस साल विशेष ध्यान पटाखा अवशेषों पर दिया गया, क्योंकि इनमें बारूद और रासायनिक तत्वों की मात्रा अधिक होती है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक माने जाते हैं।
20 टन पटाखा कचरा अलग एकत्र
BMC ने बताया कि दीपावली की रात के बाद करीब 20 टन पटाखा अवशेष अलग से एकत्र किए गए। इनमें मुख्य रूप से बारूद के अंश, धूल, प्लास्टिक रैपर, कार्डबोर्ड और पैकेजिंग सामग्री शामिल थीं। इन अवशेषों को अलग-अलग थैलों में पैक कर, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री (लगभग 5 टन) को मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) भेजा गया।
शेष 15 टन खतरनाक विस्फोटक कचरे को शहर के गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों पर सुरक्षित रूप से रखा गया है, जिसे अब पिथमपुर (धार) स्थित वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई में भेजा जाएगा।
विशेष सफाई अभियान और निगरानी
नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त देवेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि दीपावली के अगले दिन शहरभर में अतिरिक्त कचरा संग्रहण राउंड चलाए गए। जिन क्षेत्रों में तकनीकी बाधाएं आईं, वहां बैकअप वाहनों को तैनात किया गया। पूरे अभियान की निगरानी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से की गई, जो स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत संचालित होता है।
‘खतरनाक कचरे का सुरक्षित निपटान हमारी प्राथमिकता’
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि पटाखा कचरे को खतरनाक अपशिष्ट के रूप में वर्गीकृत कर अलग से संभाला गया। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया अब आगामी एकादशी जैसे आयोजनों पर भी लागू की जाएगी, ताकि पर्यावरणीय सुरक्षा और नागरिक स्वास्थ्य दोनों सुनिश्चित किए जा सकें।
पर्यावरण पर असर और जिम्मेदारी की दिशा
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखों से उत्पन्न कचरा हवा, मिट्टी और जलस्रोतों को प्रदूषित कर सकता है। ऐसे में नगर निगम की यह पहल न केवल स्वच्छता अभियान को मजबूत करती है, बल्कि सतत अपशिष्ट प्रबंधन (Sustainable Waste Management) की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
भोपाल स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अपनाई जा रही यह वैज्ञानिक प्रक्रिया आने वाले समय में अन्य शहरों के लिए भी मॉडल अप्रोच साबित हो सकती है।
