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भोपाल में चायवाले के साथ साइबर ठगी — जालसाजों ने बच्चे को फंसाकर उड़ाए ₹1.02 लाख UPI से

भोपाल के अयोध्या नगर इलाके में एक चायवाले के साथ ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। अज्ञात साइबर अपराधियों ने चतुराई से उसके बेटे...

Oct 30
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भोपाल में चायवाले के साथ साइबर ठगी — जालसाजों ने बच्चे को फंसाकर उड़ाए ₹1.02 लाख UPI से

भोपाल के अयोध्या नगर इलाके में एक चायवाले के साथ ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। अज्ञात साइबर अपराधियों ने चतुराई से उसके बेटे को फंसाकर ₹1.02 लाख UPI ट्रांजेक्शनों के ज़रिए ठग लिए। पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर 24 घंटे के भीतर शिकायत की, लेकिन अब तक रकम की वसूली नहीं हो सकी है।


फोन कॉल से शुरू हुई ठगी की कहानी

पीड़ित राजेंद्र कुमार बकोरिया, जो सहारा स्टेट कॉलोनी में रहते हैं और चाय की दुकान चलाते हैं, ने पुलिस को बताया कि 27 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। उस समय दुकान पर ग्राहकों की भीड़ थी, इसलिए उन्होंने फोन अपने बेटे को दे दिया।

कॉलर ने बच्चे से बड़ी चालाकी से बातचीत की और उसे UPI ऐप के ज़रिए दो ट्रांजेक्शन करने के लिए कहा। थोड़ी देर बाद राजेंद्र के दो बैंक खातों से ₹51,000-₹51,000 यानी कुल ₹1.02 लाख कट गए।


फर्जी स्क्रीनशॉट से बनाया भरोसा

शिकायत के अनुसार, ठगों ने पैसे भेजे जाने का झांसा देने के लिए एक नकली पेमेंट स्क्रीनशॉट भी भेजा, ताकि पीड़ित को लगे कि उनके खाते में रकम जमा हो गई है। कुछ समय बाद जब राजेंद्र ने बैंक बैलेंस चेक किया, तो पाया कि पैसा उनके खातों से ही डेबिट हो चुका है।


पुलिस जांच और साइबर रिकवरी में देरी

राजेंद्र ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट करने के बावजूद अब तक राशि ब्लॉक या रिकवर नहीं हुई है। इसके बाद उन्होंने अयोध्या नगर थाना में भी लिखित शिकायत दी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामला दर्ज कर लिया गया है और साइबर सेल को ट्रांजेक्शन डिटेल्स ट्रेस करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि ठगों ने अलग-अलग UPI IDs का उपयोग कर रकम ट्रांसफर की थी।


बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता

भोपाल में पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और बुजुर्गों को फोन या QR कोड स्कैन के ज़रिए ठगा गया है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ठग अक्सर भरोसेमंद बातों या नकली स्क्रीनशॉट्स के ज़रिए लोगों को फंसाते हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह:

  • किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर UPI ट्रांजेक्शन न करें।