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भोपाल: निजी स्कूल की प्रिंसिपल पर छठवीं कक्षा के छात्र को 10–15 थप्पड़ मारने का आरोप, बेहोश हुआ बच्चा; अभिभावकों ने दर्ज कराई शिकायत

ईदगाह हिल्स स्थित एक निजी स्कूल की महिला प्रिंसिपल पर 12 वर्षीय छात्र को कई बार थप्पड़ मारने, अपमानित करने और धमकाने का गंभीर आरोप...

Nov 21
2 मिनट में पढ़ें
भोपाल: निजी स्कूल की प्रिंसिपल पर छठवीं कक्षा के छात्र को 10–15 थप्पड़ मारने का आरोप, बेहोश हुआ बच्चा; अभिभावकों ने दर्ज कराई शिकायत

ईदगाह हिल्स स्थित एक निजी स्कूल की महिला प्रिंसिपल पर 12 वर्षीय छात्र को कई बार थप्पड़ मारने, अपमानित करने और धमकाने का गंभीर आरोप लगा है। घटना के बाद बच्चा बेहोश हो गया और परिजनों ने शाहजहानाबाद थाने में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। मामला अब शिक्षा विभाग की जांच में जाएगा।


घटना कैसे हुई?

मंगलवार दोपहर यह घटना सामने आई। छात्र के पिता के अनुसार, उन्हें दोपहर 2 बजे स्कूल से फोन आया कि उनका बेटा अचानक बीमार हो गया है और तुरंत घर ले जाना होगा।

पिता जब स्कूल पहुंचे, तो बच्चा सांस लेने में तकलीफ की शिकायत कर रहा था और कुछ मिनट बाद वहीं बेहोश हो गया। परिजन उसे तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां कुछ समय बाद उसने होश संभाला।


बच्चे ने क्या बताया?

होश में आने पर बच्चे ने कहा कि कक्षा में एक सहपाठी से हुई बहस के बाद टीचर उसे प्रिंसिपल के पास ले गईं।
माता–पिता के अनुसार, बच्चे का दावा है कि:

  • प्रिंसिपल ने उसे लगातार 10 से 15 थप्पड़ मारे,

  • अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया,

  • और यहां तक कहा कि वे उसका भविष्य बर्बाद कर देंगी

परिजनों का आरोप है कि बुरा व्यवहार और लगातार हिंसा के चलते बच्चा मानसिक सदमे में चला गया और वहीं बेहोश हो गया।


पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

शाहजहानाबाद थाने के प्रभारी उमेश पाल सिंह चौहान ने बताया कि परिजनों की शिकायत प्राप्त हो गई है।

  • दोनों पक्षों को कलेक्टर कार्यालय में अपनी बात रखने को कहा गया है।

  • शिक्षा विभाग द्वारा प्रारंभिक जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • घटना के समय के CCTV फुटेज स्कूल से मंगाए जाएंगे और उनकी जांच की जाएगी।

अधिकारी ने कहा कि कोई भी निर्णय तथ्यों के सत्यापन और शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के बाद ही लिया जाएगा।


बढ़ता सवाल: स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा

यह मामला उन घटनाओं में एक और जोड़ है, जहाँ स्कूल स्टाफ द्वारा बच्चों के साथ शारीरिक दंड व दुर्व्यवहार के आरोप सामने आते हैं।
बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • किसी भी परिस्थिति में शारीरिक दंड कानूनी रूप से प्रतिबंधित है,

  • ऐसे मामलों में स्कूलों में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी को कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए,

  • और शिकायतों की त्वरित और पारदर्शी जांच अनिवार्य है।

अभिभावकों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि ऐसे मामलों में रोक लगाई जा सके।