इलाहाबाद हाई कोर्ट: बोर्ड सचिव को कक्षा 10 और 12 की पाठ्यपुस्तकों पर अधिकार
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज के बोर्ड सचिव को कक्षा 10 और 12 के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करने का अधिकार बरकरार रखा है। यह फैसला...

मुख्य बातें
- क्या हुआ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बोर्ड सचिव, प्रयागराज को कक्षा 10 और 12 के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करने का अधिकार दिया।
- यह क्यों महत्वपूर्ण है: उत्तर प्रदेश में शैक्षिक सामग्री चयन से संबंधित भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है।
- लोगों के लिए क्या बदलाव: पाठ्यपुस्तकों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया पर स्पष्टता प्रदान करता है और प्रकाशकों के बीच भ्रम से बचाता है।
- कौन प्रभावित है: हाई स्कूल और इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड, पाठ्यपुस्तक प्रकाशक और उत्तर प्रदेश में कक्षा 10 और 12 के छात्र।
उच्च न्यायालय ने बोर्ड सचिव के अधिकार को बरकरार रखा
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि हाई स्कूल और इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड, प्रयागराज के सचिव को पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करने का अधिकार है। यह फैसला कक्षा 10 और 12 में पढ़ाई को लेकर है।
मामले का विवरण
न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और गरिमा प्रसाद की दो न्यायाधीशों की पीठ ने यह आदेश जारी किया। यह आदेश मेसर्स राजीव प्रकाशन द्वारा बोर्ड सचिव के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में आया। न्यायालय का आदेश 19 फरवरी का है।
प्रकाशकों के लिए निहितार्थ
अदालत ने स्पष्ट किया कि मेसर्स राजीव प्रकाशन को किताबें प्रकाशित करने या बेचने से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। बशर्ते वे उत्तर प्रदेश पाठ्यक्रम पुस्तकें अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन न करें।
"...याचिकाकर्ता को किताबें प्रकाशित करने या उन्हें खुले बाजार में बेचने से नहीं रोका जा सकता है यदि वह उत्तर प्रदेश पाठ्यक्रम पुस्तकें अधिनियम के प्रावधानों का कोई उल्लंघन नहीं कर रहा है।"
आगे क्या देखना है
बोर्ड द्वारा पाठ्यपुस्तक चयन के लिए आगे दिशानिर्देश जारी करने की संभावना है, जिससे आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए प्रकाशक और शैक्षिक सामग्री की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। पाठ्यपुस्तकों के संबंध में बोर्ड के फैसलों को चुनौती देने वाली किसी भी भविष्य की चुनौती पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।
