महिला आरक्षण: भारत ने अधिसूचित की अहम तिथि, संशोधन विधेयक पर बहस
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए 16 अप्रैल, 2026 की तारीख तय की गई। लोकसभा में संशोधन विधेयक पर बहस जारी। सरकार...

मुख्य बातें
- क्या हुआ: विधि मंत्रालय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम 2023) को लागू करने के लिए 16 अप्रैल, 2026 की तारीख अधिसूचित की। साथ ही, लोकसभा अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयकों पर बहस कर रही है।
- महत्व: यह भारतीय संसद में महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में प्रगति का संकेत है, हालांकि यह परिसीमन अभ्यास के अधीन है। सरकार प्रक्रिया में तेजी लाने और राजनीति में महिलाओं की जल्द भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।
- क्या बदलाव: सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की अनुमति देने के लिए मौजूदा अधिनियम में संशोधन करना चाहती है, जिससे महिला आरक्षण की समय-सीमा तेज हो सकती है।
- कौन प्रभावित: इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व चाहने वाली महिलाएं, राजनीतिक दल और भविष्य में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की समग्र संरचना प्रभावित होगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का कार्यान्वयन
विधि मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 16 अप्रैल, 2026 को संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम 2023, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है, के कार्यान्वयन की तारीख के रूप में घोषित किया। यह अधिनियम विधायी निकायों में महिलाओं के आरक्षण का मार्ग प्रशस्त करता है।
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह अधिसूचना 2023 के अधिनियम द्वारा पेश किए गए संवैधानिक प्रावधानों में और संशोधन करने में सक्षम बनाने के लिए एक आवश्यक कदम है। ये संशोधन वर्तमान में लोकसभा में विचाराधीन हैं।
संवैधानिक संशोधन विधेयक पर बहस
लोकसभा में तीन विधेयकों पर सक्रिय रूप से बहस चल रही है, जिसमें संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 भी शामिल है। इस विधेयक का उद्देश्य अनुच्छेद 330A, 332A और 334A को संशोधित करना है, जिन्हें 2023 के अधिनियम के माध्यम से डाला गया था।
2023 के अधिनियम ने शुरू में महिलाओं के आरक्षण के कार्यान्वयन को अधिनियम की शुरुआत के बाद पहली जनगणना के आधार पर पहले परिसीमन अभ्यास से जोड़ा था।
महिलाओं के प्रतिनिधित्व में तेजी लाना
सरकार ने प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक पेश किया। तर्क यह है कि अगली जनगणना (जनगणना 2027) और उसके बाद के परिसीमन की प्रतीक्षा करने से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में काफी देरी होगी।
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य नवीनतम प्रकाशित जनगणना, जो कि जनगणना 2011 है, से जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन को सक्षम बनाना है। इससे संभावित रूप से 2027 की जनगणना और इसके संबंधित परिसीमन अभ्यास की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता से बचा जा सकता है।
आगे क्या देखना है
संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 का पारित होना महत्वपूर्ण है। लोकसभा में बहस का परिणाम और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की दिशा में उठाए गए बाद के कदम महिलाओं के आरक्षण के कार्यान्वयन की समय-सीमा निर्धारित करेंगे।
