“सरकारी नौकरियों के अभाव में एमपी के पहलवान दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं”—कैलाश विजयवर्गीय का विधानसभा में बड़ा बयान
मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए रोजगार नीति को लेकर अहम चर्चा हुई। नगरीय प्रशासन और विधायी कार्य मंत्री...

मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए रोजगार नीति को लेकर अहम चर्चा हुई। नगरीय प्रशासन और विधायी कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि प्रदेश के कई उत्कृष्ट पहलवान सरकारी नौकरी न मिलने के कारण हरियाणा जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व करने लगे हैं। उन्होंने माना कि खेल प्रतिभाओं को रोककर रखने के लिए राज्य को अपनी नीतियों में बदलाव की जरूरत है।
विधानसभा में सवाल-जवाब: मुद्दा कैसे उठा?
यह मामला प्रश्नकाल के दौरान तब सामने आया, जब नीमच से बीजेपी विधायक दिलिप सिंह परिहार ने खेल मंत्री विश्वास सारंग से सवाल पूछा।
परिहार ने कहा कि:
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प्रदेश की खेल प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है
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लेकिन वर्तमान में सुविधाएं केवल मेडल जीतने वालों को मिलती हैं
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कई राज्यों—जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब—में राष्ट्रीय या विश्वविद्यालय स्तर के मेडल विजेताओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में 10 अंकों का लाभ मिलता है
उन्होंने मांग रखी कि मध्य प्रदेश में भी इस तरह की प्रोत्साहन प्रणाली लागू की जाए, ताकि खिलाड़ियों पर आर्थिक बोझ कम हो और उन्हें भविष्य की सुरक्षा मिले।
“मैं भी खिलाड़ी रहा हूँ…”—परिहार का व्यक्तिगत अनुभव
परिहार ने बताया कि वे खुद 1998 में इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी गेम्स में फुटबॉल टीम का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले विश्वविद्यालय खिलाड़ियों को भी सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विजयवर्गीय का स्पष्ट बयान: “हमारे संसाधनों का उपयोग करके खिलाड़ी दूसरे राज्यों में चले जाते हैं”
परिहार की बातों का समर्थन करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा:
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“हमारे अच्छे खिलाड़ी हमारे ही अकादमी और संसाधनों का उपयोग करते हैं”
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जैसे ही वे प्रदर्शन में थोड़ा ऊँचा उठते हैं, वे नौकरी के बेहतर अवसरों के कारण हरियाणा जैसे राज्यों में चले जाते हैं
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इससे प्रदेश की खेल प्रतिभा दूसरे राज्यों के खाते में चली जाती है
विजयवर्गीय ने इसे गंभीर चुनौती बताते हुए संकेत दिया कि सरकार खिलाड़ियों के लिए रोजगार नीति की समीक्षा कर सकती है।
क्यों मायने रखती है यह बहस?
मध्य प्रदेश लंबे समय से कुश्ती, मुक्केबाज़ी, हॉकी और एथलेटिक्स में उभरती प्रतिभाओं का केंद्र रहा है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार:
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स्थायी रोजगार न मिलने से खिलाड़ी अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित रहते हैं
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हरियाणा जैसे राज्यों ने खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती, खेल कोटा, और पदक आधारित वेतन संरचना लागू कर मजबूत मॉडल तैयार किया है
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अगर एमपी में समान अवसर नहीं मिले, तो स्थानीय खेल पारिस्थितिकी को नुकसान होगा और प्रतिभा पलायन बढ़ेगा
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मुद्दे पर नीति बदलाव होने की पूरी संभावना है क्योंकि सरकार स्वयं प्रतिभा पलायन पर चिंता जता रही है।
आगे क्या?
विधानसभा में खेल मंत्री विश्वास सारंग से उम्मीद की जा रही है कि वे रोजगार और मूल्यांकन अंकों में बढ़ोतरी से जुड़े प्रस्ताव पर विचार कर एक नई नीति का खाका प्रस्तुत करेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, सरकार खेल अकादमियों में निवेश बढ़ाने और खिलाड़ियों के लिए स्थायी करियर मार्ग सुनिश्चित करने पर काम कर रही है।
