रतलाम में आठवीं के छात्र ने स्कूल की तीसरी मंज़िल से छलांग लगाई; प्रिंसिपल पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज
रतलाम में स्कूल परिसर में बड़ा हादसा मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में एक निजी स्कूल में शुक्रवार सुबह गंभीर घटना सामने आई, जहां आठवीं...
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रतलाम में स्कूल परिसर में बड़ा हादसा
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में एक निजी स्कूल में शुक्रवार सुबह गंभीर घटना सामने आई, जहां आठवीं कक्षा के एक छात्र ने कथित रूप से मानसिक दबाव के चलते स्कूल की तीसरी मंज़िल से छलांग लगा दी। छात्र को गंभीर चोटें आईं, हालांकि डॉक्टरों ने उसकी हालत स्थिर बताई है। मामले ने स्कूलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की सीमा और बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्र के बयान के आधार पर प्रिंसिपल पर केस
पुलिस के अनुसार, छात्र ने दिए गए अपने बयान में आरोप लगाया कि स्कूल की प्रिंसिपल डॉली चौहान ने उसे मोबाइल फोन लाने और क्लासरूम में वीडियो बनाने के कारण कठोर फटकार लगाई, धमकियां दीं और अपमानित किया। छात्र ने यह भी बताया कि उसने बार-बार अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगी, लेकिन उसकी बात सुनी नहीं गई।
छात्र की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रिंसिपल पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(बी), 351(2) और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश खाखा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में छात्र ने खुद को भविष्य बिगाड़ने की धमकी से अत्यधिक भयभीत बताया। अधिकारियों के अनुसार, छात्राें द्वारा भावनात्मक दबाव या दंड की आशंका के चलते जोखिमपूर्ण निर्णय लेना, देशभर में समय-समय पर सामने आने वाली एक गंभीर समस्या है।
घटना कैसे हुई
पुलिस ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे स्कूल प्रबंधन ने छात्र के पिता को बुलाकर शिकायत की कि वह स्कूल में मोबाइल फोन लाया और क्लासरूम में वीडियो रिकॉर्ड किया। इसके बाद छात्र को प्रिंसिपल के कक्ष में ले जाया गया, जहां कथित रूप से कठोर फटकार और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
डरा-सहमा छात्र वहां से निकलकर स्कूल की तीसरी मंज़िल पर पहुंचा और नीचे कूद गया।
गंभीर चोटें लगने पर स्कूल प्रशासन उसे तुरंत अस्पताल ले गया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
शैक्षणिक मनोविज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन किसी भी छात्र पर अत्यधिक भावनात्मक दबाव डालना खतरनाक परिणाम दे सकता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि मोबाइल फोन प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर काउंसलिंग-आधारित दृष्टिकोण अपनाना अधिक प्रभावी हो सकता है।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना को लेकर चिंता जताई और कहा कि “अनुशासनात्मक प्रक्रिया में बच्चों की गरिमा और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।”
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने बताया कि वह स्कूल स्टाफ, मौके पर मौजूद छात्रों और अभिभावकों के बयान भी दर्ज कर रही है। सीसीटीवी फुटेज और स्कूल की आंतरिक प्रक्रियाओं की भी जांच की जाएगी। फिलहाल प्रिंसिपल से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
यह घटना उन तमाम बहसों को फिर से जगा देती है कि स्कूलों में अनुशासन लागू करने की सीमाएं क्या होनी चाहिए और बच्चों की मानसिक सेहत की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
