BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
National

एमपी में फिर लौटेगा प्रत्यक्ष चुनाव का सिस्टम: नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्ष अब जनता सीधे चुनेगी

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए ‘मध्यप्रदेश नगरपालिका क़ानून (संशोधन) अध्यादेश, 2025’ को...

Nov 26
3 मिनट में पढ़ें
एमपी में फिर लौटेगा प्रत्यक्ष चुनाव का सिस्टम: नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्ष अब जनता सीधे चुनेगी

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए ‘मध्यप्रदेश नगरपालिका क़ानून (संशोधन) अध्यादेश, 2025’ को आगामी 1 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश करने की मंजूरी दे दी गई। इस अध्यादेश के लागू होने के बाद नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों का चुनाव एक बार फिर सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाएगा।


प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की पृष्ठभूमि

मध्य प्रदेश में 2015 तक नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के प्रमुखों को जनता सीधे चुनती थी।
लेकिन 25 सितंबर 2018 को तत्कालीन 15 माह की कमलनाथ सरकार ने मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 में संशोधन करते हुए यह प्रक्रिया बदल दी।

  • नए प्रावधान के तहत प्रमुखों का चुनाव सीधे जनता की जगह निर्वाचित पार्षदों द्वारा होने लगा।

जब 2020 में भाजपा सरकार दोबारा सत्ता में लौटी, तब उस समय के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 दिसंबर 2020 को निर्णय लिया कि

  • नगर निगमों के महापौर सीधे जनता द्वारा चुने जाएंगे,

  • लेकिन नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों का चुनाव पार्षद करेंगे।

इसके बाद 2022 में एक और संशोधन लाकर महापौरों के प्रत्यक्ष चुनाव को दोबारा लागू किया गया।
2022 के नगरीय निकाय चुनाव इन्हीं नियमों के तहत हुए—

  • महापौरों का प्रत्यक्ष चुनाव,

  • नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्षों का अप्रत्यक्ष चुनाव


अब क्यों लाया गया है नया अध्यादेश?

राज्य सरकार का तर्क है कि स्थानीय शासन को मजबूत करने के लिए जनता को अपने शहरी निकायों का नेतृत्व चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।
कैबिनेट बैठक के बाद शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा:

“सरकार का उद्देश्य है कि सभी स्थानीय निकायों के प्रमुख जनता की सीधी भागीदारी से चुने जाएं। अध्यादेश इसी व्यवस्था को फिर से बहाल करेगा।”

2027 में होने वाले अगले नगरीय निकाय चुनावों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा, जो विधानसभा चुनाव 2028 से एक वर्ष पहले होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रत्यक्ष चुनाव की वापसी से शहरी मतदाताओं का जुड़ाव और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगे।


कैबिनेट का दूसरा बड़ा निर्णय: नक्सल अभियान में शहीद इंस्पेक्टर के परिवार को 1 करोड़ की मदद

बैठक में एक भावनात्मक निर्णय भी लिया गया।
होकरफ़ोर्स, बालाघाट के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा, जो 19 नवंबर 2025 को नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हो गए थे, उनके परिवार को राज्य सरकार 1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी।

इसके साथ ही, मंत्रीमंडल ने

  • शहीद के छोटे भाई अंकित शर्मा को जिला पुलिस बल में उप निरीक्षक (SI) के रूप में संवेदना आधारित नियुक्ति देने की मंजूरी भी दी।

सरकार ने कहा कि यह कदम सुरक्षा बलों के मनोबल को मजबूत करने और उनके परिजनों को सम्मानजनक सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।