भारत ने डीज़ल, विमान ईंधन के निर्यात पर अप्रत्याशित कर में भारी वृद्धि की
भारत ने डीज़ल और विमान टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात शुल्क में तत्काल प्रभाव से वृद्धि की है। पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव...

मुख्य बातें
क्या हुआ: भारत ने 11 अप्रैल से तत्काल प्रभाव से डीज़ल और विमान टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क बढ़ा दिया है।
महत्व क्यों: राजस्व विभाग के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को संबोधित करना है।
लोगों के लिए क्या बदलाव: डीज़ल और एटीएफ निर्यात से संबंधित लागत में वृद्धि। पेट्रोल निर्यात शुल्क अपरिवर्तित है।
कौन प्रभावित: डीज़ल और विमान टरबाइन ईंधन के निर्यातक इन परिवर्तनों से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
डीज़ल निर्यात शुल्क में भारी वृद्धि
भारत ने डीज़ल पर निर्यात शुल्क में भारी वृद्धि की है। विंडफॉल टैक्स दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।
डीज़ल पर शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 55.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।
विमान ईंधन कर में वृद्धि
विमान टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क भी बढ़ाया गया है। यह परिवर्तन भी 11 अप्रैल से तत्काल प्रभाव से लागू है।
एटीएफ पर नया शुल्क अब 42 रुपये प्रति लीटर है, जो पहले 29.5 रुपये प्रति लीटर था।
पेट्रोल निर्यात शुल्क अपरिवर्तित
गौरतलब है कि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क अपरिवर्तित है। यह शून्य पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि पेट्रोल पर कोई निर्यात शुल्क नहीं है।
आधिकारिक अधिसूचना
वित्त मंत्रालय ने शनिवार, 11 अप्रैल को इन परिवर्तनों के संबंध में एक अधिसूचना जारी की।
राजस्व विभाग ने 11 अप्रैल को मौजूदा परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता का हवाला देते हुए अधिसूचनाएं जारी कीं।
राजस्व विभाग का तर्क
राजस्व विभाग ने स्थिति की तात्कालिकता पर जोर दिया। अधिसूचनाओं में तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता का हवाला दिया गया। यह मौजूदा परिस्थितियों के कारण था।
आगे क्या देखना है
- आगामी सरकारी बयानों और ऊर्जा नीति में संभावित समायोजन पर नज़र रखें।
- ट्रैक करें कि ये शुल्क परिवर्तन भारतीय निर्यात और घरेलू ईंधन की कीमतों को कैसे प्रभावित करते हैं।
