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कर्नाटक में नेतृत्व बदलाव की अटकलें तेज: हाईकमान के फैसले का इंतज़ार, दिल्ली में जुट रहे विधायक

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने निर्णय को हाईकमान पर छोड़ दिया...

Nov 25
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कर्नाटक में नेतृत्व बदलाव की अटकलें तेज: हाईकमान के फैसले का इंतज़ार, दिल्ली में जुट रहे विधायक

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने निर्णय को हाईकमान पर छोड़ दिया है, जिसके बाद पूरी निगाहें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर टिक गई हैं। इस बीच उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थक विधायक लगातार दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


हाईकमान के संकेत से पहले सबकुछ ठहराव पर

पार्टी सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी के स्पष्ट निर्देश मिलने तक राज्य में किसी बड़े राजनीतिक परिवर्तन की उम्मीद नहीं है। कांग्रेस संगठन महामंत्री के.सी. वेणुगोपाल के बेंगलुरु होकर दिल्ली जाने की जानकारी ने अटकलों को और हवा दी है। दिल्ली में पहले से ही मौजूद दो समूहों के बाद छह और विधायक रविवार देर रात वहां पहुंचे।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बिहार चुनाव नतीजों के बाद केंद्रीय नेतृत्व औपचारिक रूप से नहीं मिला है, इसलिए कर्नाटक की स्थिति पर चर्चा भी इसी संदर्भ में होगी।


सिद्धारमैया ने दोहराया—‘हाईकमान जो कहेगा वही स्वीकार’

इन सबके बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार को चिक्कबल्लापुर में एक सरकारी कार्यक्रम की मंच-साझेदारी करते देखा गया।
कार्यक्रम के बाद बातचीत में सिद्धारमैया ने कहा कि वे पार्टी नेतृत्व के फैसले के आगे झुकने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि यदि हाईकमान उन्हें जारी रखने के लिए कहेगा, तो वे काम करते रहेंगे। शिवकुमार ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि “सिद्धारमैया जो कहते हैं, वह हम सबके लिए मार्गदर्शन की तरह है और वे पार्टी की अहम संपत्ति हैं।”

सिद्धारमैया के करीबी नेताओं का दावा है कि चर्चा केवल कैबिनेट पुनर्गठन पर होनी है, न कि मुख्यमंत्री पद पर।


दिल्ली दौरे का उद्देश्य—नेतृत्व परिवर्तन या मंत्री पद?

शिवकुमार ने दिल्ली जा रहे विधायकों को लेकर कहा कि उनमें से कई मंत्री पद के इच्छुक हैं और दिल्ली जाकर अपनी बात रखना गलत नहीं है।
हालाँकि मुख्यमंत्री समर्थक गुट का कहना है कि दिल्ली पहुंचने वाले अधिकांश विधायक केंद्रीय नेताओं से मुलाकात नहीं कर पा रहे और “खाली हाथ लौट रहे” हैं।


डी.के. सुरेश की सक्रियता और ‘रोटेशन फॉर्मूला’ की चर्चा

पूर्व सांसद और शिवकुमार के भाई डी.के. सुरेश भी इन दिनों काफी सक्रिय दिख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में उन्होंने सिद्धारमैया को उस “नेतृत्व रोटेशन फॉर्मूला” की याद दिलाई, जिस पर 2023 में शपथ से पहले दिल्ली में सहमति बनी थी।

पार्टी के जानकार बताते हैं कि शपथ से दो दिन पहले खड़गे के घर हुई बैठक में सुरेश ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने पर जोर दिया था, जिसे सिद्धारमैया ने केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में संभाला था।


क्या शिवकुमार समर्थन जुटा रहे हैं?

कुछ पार्टी नेताओं का कहना है कि शिवकुमार विधायकों से हस्ताक्षर कराकर समर्थन की संख्या दिखाने में जुटे हैं। उनके अनुसार यह संख्या 2023 में कांग्रेस विधानमंडल दल की बैठक के मुकाबले काफी अधिक बताई जा रही है।

हालाँकि मुख्यमंत्री कार्यालय ने किसी भी हस्ताक्षर अभियान की खबर को पूरी तरह नकार दिया है।


विपक्ष का निशाना—'घोड़ाबाज़ारी शुरू', कांग्रेस का पलटवार

भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के अंदर “घोड़ाबाज़ारी” शुरू हो चुकी है और नेतृत्व परिवर्तन के लिए 60–70 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है।

शिवकुमार ने इस आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को “खरीद-फरोख्त की राजनीति” की आदत है और इसकी मिसालें विधानसभा रिकॉर्ड में दर्ज हैं। उनका दावा है कि पिछली बार सत्ता में आने के लिए भाजपा ने बड़े पैमाने पर संसाधनों का इस्तेमाल किया था।


यह घटनाक्रम क्यों महत्वपूर्ण है?

  • कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर लंबी खींचतान पार्टी की स्थिरता और शासन पर सवाल खड़े करती है।

  • पिछले एक साल में कई बार सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच शक्ति-संतुलन की चर्चा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है।

  • जिस तरह बिहार परिणामों के बाद कांग्रेस नए नेतृत्व-रणनीति पर विचार कर रही है, कर्नाटक का फैसला पार्टी की राष्ट्रीय छवि और 2026 की तैयारियों पर असर डाल सकता है।