भोपाल: ट्राइबल म्यूज़ियम की विरासत ने आसियान देशों के राजनयिकों को किया मंत्रमुग्ध, भारत की आदिवासी संस्कृति के लिए जताई गहरी प्रशंसा
भोपाल के ट्राइबल म्यूज़ियम में गुरुवार को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। आसियान देशों के शीर्ष राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल जब विभिन्न दीर्घाओं से गुज़रा,...
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भोपाल के ट्राइबल म्यूज़ियम में गुरुवार को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। आसियान देशों के शीर्ष राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल जब विभिन्न दीर्घाओं से गुज़रा, तो उनके कदम धीमे पड़ गए, आवाज़ें मुलायम हो गईं और कैमरे उसी उत्साह से चमक उठे—मानो वे किसी प्राचीन रहस्य से पहली बार रूबरू हो रहे हों। भारतीय जनजातीय संस्कृति का यह सजीव संसार उनके लिए केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बन गया।
उच्चस्तरीय राजनयिकों का विशेष दौरा
यह दौरा संस्कृति विभाग और एमपी टूरिज़्म बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे:
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गुयेन थान्ह हाइ, वियतनाम के भारत में राजदूत
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जोसल इग्नासियो, फिलीपींस के भारत में राजदूत
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रथ मेनी, कंबोडिया के भारत में राजदूत
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कार्लिटो नुनेस, तिमोर-लेस्ते के भारत में राजदूत
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चावानार्ट थांगसुमफांट, थाईलैंड के भारत में राजदूत
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इना एच. कृष्णमुर्ति, इंडोनेशिया की भारत में राजदूत
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स्याफी अलवाली पेंगिरान अबू बकर, ब्रुनेई दारुस्सलाम के मिशन प्रमुख
इन सभी ने भारत की आदिवासी कलाओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक स्मृतियों में गहरी रुचि और सम्मान व्यक्त किया।
विरासत से भरी दीर्घाओं में एक भावनात्मक यात्रा
ट्राइबल म्यूज़ियम की हर दीर्घा ने राजनयिकों को जैसे किसी जीवित कहानी में प्रवेश कराया।
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लकड़ी की नक्काशी पर रुककर उन्होंने उंगलियों से उसकी महीन रेखाओं को महसूस किया।
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रंगों से भरे पैनलों के सामने वे लंबे समय तक ठहर गए।
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'लिखंदारा' लाइब्रेरी की शांत दीवारों के बीच उन्हें आदिवासी ज्ञान परंपरा की गहराई का एहसास हुआ।
गोंड, भील और बैगा समुदायों के मिट्टी-और-बांस से बने पारंपरिक घरों से लेकर आध्यात्मिकता का स्पर्श लिए टेराकोटा व भित्तिचित्र—हर कला रूप राजनयिकों को प्रकृति और मानव के रिश्तों की मूल जड़ों तक ले गया।
संग्रहालय निदेशक ने बांधी परंपराओं की कहानी
संग्रहालय के निदेशक अशोक मिश्रा ने पूरी टीम को अलग-अलग कला-रूपों, परंपराओं और समुदायों के जीवन दर्शन से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि राजनयिकों ने प्रदर्शनी को “अविश्वसनीय रूप से सुंदर” और “मन को छू लेने वाला अनुभव” बताया।
मिश्रा के अनुसार, एक सदस्य ने कहा—
“हमने इससे पहले कहीं भी इतना अद्भुत, जीवंत और प्रेरणादायक आदिवासी कला-संसार नहीं देखा। मध्य प्रदेश सरकार का धन्यवाद, जिसने हमें आपकी पारंपरिक विरासत के इतने करीब आने दिया।”
आदिवासी शिल्प की सौगातें बनीं यादगार क्षण
दौरे के अंत में प्रतिनिधिमंडल को:
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भारवा शैली का पीतल का हिरण,
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और गोंड व भील पेंटिंग्स
उपहारस्वरूप प्रदान की गईं। ये कलाकृतियाँ सिर्फ स्मृति-चिह्न नहीं, बल्कि सदियों पुरानी जनजातीय धड़कनों को साथ ले जाने वाला प्रतीक हैं।
भारत–आसियान सांस्कृतिक संबंधों को मिला नया आयाम
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा दौरा भारत और आसियान देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
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यह भारत की जनजातीय विविधता,
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उसकी सामुदायिक परंपराओं,
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तथा संस्कृति-आधारित पर्यटन की क्षमता को विश्व पटल पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।
एमपी टूरिज़्म के अधिकारियों का मानना है कि ऐसे अनुभव राज्य की विरासत को वैश्विक पहचान देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
