दिल्ली धमाका: ‘शहादत’ बताने वाले आतंकी उमर नबी को असदुद्दीन ओवैसी का सख्त संदेश — “इस्लाम में हराम, यह सिर्फ आतंकवाद”
लाल किले के पास हुए हमले के आरोपी का वीडियो मिला; एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा—मजहब के नाम पर हिंसा का कोई औचित्य नहीं लीड दिल्ली...

लाल किले के पास हुए हमले के आरोपी का वीडियो मिला; एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा—मजहब के नाम पर हिंसा का कोई औचित्य नहीं
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दिल्ली में हालिया कार बम धमाके में शामिल आतंकी उमर नबी का एक पुराना वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। वीडियो में उमर नबी फिदायीन हमलों को “इस्लाम में न्यायोचित” बताने की कोशिश करता दिख रहा है, जिस पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने कहा कि आत्मघाती हमला और निर्दोषों की हत्या इस्लाम में हराम है और ऐसी सोच आतंकवाद को बढ़ावा देती है।
वीडियो कैसे मिला?
NIA और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को उमर नबी का मोबाइल फोन कश्मीर में उसके घर से बरामद हुआ।
जांच अधिकारियों के अनुसार:
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धमाके से कुछ दिन पहले उमर नबी श्रीनगर गया था।
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उसने अपना फोन अपने भाई को देकर कहा था कि “अगर कुछ हो जाए तो इसे पानी में फेंक देना।”
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पूछताछ में भाई ने फोन सौंप दिया, जिसके विश्लेषण के दौरान यह वीडियो सामने आया।
वीडियो में उमर नबी दावा करता है कि आत्मघाती हमले “शहादत” हैं और उन्हें “गलत समझा गया है।” वह कहता है कि ऐसे हमलों को इस्लामिक शिक्षाओं में उचित ठहराया गया है—एक दावा जिसका कई इस्लामी विद्वान वर्षों से खंडन करते रहे हैं।
ओवैसी का सख्त जवाब: “इस्लाम में हराम, कानून के खिलाफ”
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस वीडियो पर एक्स (ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उमर नबी जैसी सोच इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है।
उन्होंने लिखा कि:
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आत्महत्या इस्लाम में हराम है
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निर्दोषों की हत्या “सबसे बड़ा पाप”
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फिदायीन हमला “शहादत नहीं, आतंकवाद”
ओवैसी ने जोर दिया कि किसी भी धार्मिक शिक्षण में नागरिकों पर हिंसक हमले की अनुमति नहीं है और ऐसे कुतर्क सिर्फ आतंकी संगठनों की विचारधारा को मजबूती देते हैं।
गृह मंत्रालय पर सवाल — “अगर कोई भर्ती नहीं हुई, तो यह मॉड्यूल आया कहां से?”
ओवैसी ने गृह मंत्री अमित शाह के हालिया दावे पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि:
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ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के दौरान केंद्र ने संसद में कहा था कि “पिछले छह महीनों में कोई स्थानीय कश्मीरी आतंकी संगठनों में शामिल नहीं हुआ।”
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यदि यह सही है, तो उमर नबी जैसे मॉड्यूल की भर्ती और रेडिकलाइजेशन कैसे हुआ?
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इस नेटवर्क का समय पर पता क्यों नहीं लगाया गया?
Security analysts भी कह रहे हैं कि यह मामला स्थानीय कट्टरपंथ, डिजिटल रेडिकलाइजेशन और मॉड्यूल्स की चुपचाप सक्रियता जैसी बड़ी चुनौतियों को उजागर करता है।
धमाके का मामला — अभी तक क्या सामने आया है
दिल्ली में लाल किले के पास कार में विस्फोट होने से 15 लोगों की मौत हुई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने हमले को “सोच-समझकर रची गई आतंकी साजिश” बताया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जानकारी से लगता है कि उमर नबी लंबे समय से कट्टरपंथी सामग्री से प्रभावित था और फिदायीन हमले को धार्मिक कर्तव्य के रूप में प्रस्तुत कर रहा था।
इस मामले का व्यापक प्रभाव
विशेषज्ञों ने इसे भारत में आतंकवाद के बदलते स्वरूप और डिजिटल कट्टरपंथ की चुनौतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है।
मुख्य चिंताएँ:
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स्थानीय स्तर पर छिपे मॉड्यूल्स की पहचान में खामियां
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युवाओं में सोशल मीडिया आधारित रेडिकलाइजेशन
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कश्मीर और बाकी भारत में आतंकवाद-रोधी रणनीति की जटिलताएं
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राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को मॉड्यूल ट्रैकिंग और साइबर मॉनिटरिंग को और मजबूत करने की जरूरत
सोशल मीडिया सारांश (2–3 वाक्य)
दिल्ली धमाके के आरोपी उमर नबी का वीडियो सामने आया, जिसमें वह फिदायीन हमले को “शहादत” बताता है। असदुद्दीन ओवैसी ने उसके दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आत्मघाती हमला और निर्दोषों की हत्या इस्लाम में हराम है। ओवैसी ने गृह मंत्रालय से भी पूछा—अगर कोई नई भर्ती नहीं हुई, तो यह आतंकी मॉड्यूल बना कैसे?
