केरवा डैम पुल पर बड़ा हादसा टला, तीन स्लैब गिरे — राज्यभर में सभी बांधों की तकनीकी जांच के आदेश
भोपाल के केरवा डैम पुल पर मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया, जब गेट नंबर-8 के ऊपर लगा भारी कंक्रीट स्लैब अचानक टूटकर गिर गया।...

भोपाल के केरवा डैम पुल पर मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया, जब गेट नंबर-8 के ऊपर लगा भारी कंक्रीट स्लैब अचानक टूटकर गिर गया। सौभाग्य से उस समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
घटना के बाद जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और अधिकारियों को तुरंत मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।
तीन गेटों के ऊपर की स्लैब पहले ही गिर चुकी
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, डैम के आठ में से तीन गेटों के ऊपर लगी कंक्रीट स्लैब पहले ही गिर चुकी हैं।
बाकी ढांचा भी गंभीर रूप से जर्जर अवस्था में है। लोहे की छड़ों में जंग लग चुकी है और कंक्रीट टूटकर झरने लगी है, जिससे पूरी संरचना की स्थिरता खतरे में है।
पांच करोड़ में नया फुटब्रिज बनेगा
निरीक्षण के दौरान मंत्री सिलावट ने घोषणा की कि केरवा डैम के फुटब्रिज का पुनर्निर्माण पांच करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्य को पांच महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
साथ ही, डैम के सभी आठ पुराने गेट भी बदले जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी भी दुर्घटना की संभावना समाप्त की जा सके।
राज्य के सभी बांधों की तकनीकी जांच का आदेश
मंत्री ने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया कि मध्य प्रदेश के सभी बांधों की तकनीकी जांच तत्काल शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि हर नदी बेसिन में मौजूद बांधों की स्थिति का विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, जिसमें गेट और पुलों की मजबूती, जंग की स्थिति और मरम्मत की आवश्यकता का उल्लेख हो।
सिलावट ने कहा कि 40 वर्ष से अधिक पुराने बांधों का तत्काल उन्नयन (अपग्रेडेशन) किया जाएगा, जबकि 25 वर्ष से अधिक पुराने बांधों को प्राथमिकता के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित कर निरीक्षण किया जाएगा।
‘ऐसी घटनाएं दोबारा न हों’ – सिलावट
मंत्री ने विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगते हुए कहा,
“ऐसी घटनाएं प्रदेश के किसी भी बांध में दोबारा न हों। सुरक्षा और रखरखाव में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
🔹 पृष्ठभूमि: राजधानी की जल आपूर्ति और पर्यावरणीय महत्व
केरवा डैम भोपाल के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत होने के साथ-साथ लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संरचनात्मक गिरावट सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि शहर की जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन का भी गंभीर मुद्दा है।
पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ते जंग, रिसाव और मरम्मत में देरी ने इस डैम को “जोखिम श्रेणी” में ला दिया है।
