भोपाल में एनजीटी का सख्त रुख: भोज वेटलैंड से एक महीने में हटेंगी सभी अवैध निर्माण, पारिस्थितिक अध्ययन के आदेश
भोपाल की जीवनरेखा कही जाने वाली भोज वेटलैंड पर जारी अतिक्रमण और प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सेंट्रल ज़ोन बेंच ने बुधवार...

भोपाल की जीवनरेखा कही जाने वाली भोज वेटलैंड पर जारी अतिक्रमण और प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सेंट्रल ज़ोन बेंच ने बुधवार को कड़ा रुख अपनाया। ट्रिब्यूनल ने भोपाल नगर निगम (BMC) और जिला कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वे एक माह के भीतर सभी अवैध निर्माण हटाएँ और कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
पर्यावरणविद की याचिका पर सुनवाई
यह आदेश पर्यावरणविद रशीद नूर खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। खान ने बताया कि वेटलैंड क्षेत्र में लगातार अवैध निर्माण और प्रदूषण हो रहा है, जबकि अदालत ने कई बार रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
ट्रिब्यूनल ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि 2020 से मामला लंबित है, परंतु जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखा। अदालत ने साफ कहा कि राज्य और स्थानीय निकायों का दायित्व है कि वे इस पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र की रक्षा करें।
एनजीटी ने मांगी पर्यावरणीय रिपोर्ट
एनजीटी ने भोपाल नगर निगम को निर्देशित किया कि वह राज्य वेटलैंड प्राधिकरण और वन विभाग के सहयोग से भोज वेटलैंड की पारिस्थितिकीय स्थिति का विस्तृत अध्ययन कराए।
इस अध्ययन में झील के वर्तमान जलगुणवत्ता, जैव विविधता और पक्षियों की संख्या का आंकलन शामिल होगा। सर्दियों के मौसम में बर्ड सेंसेस (पक्षी गणना) भी कराई जाएगी, ताकि भविष्य के संरक्षण कार्यों के लिए आधारभूत आंकड़े तैयार किए जा सकें।
38 अतिक्रमणकर्ताओं की पहचान
भोपाल नगर निगम ने ट्रिब्यूनल को बताया कि अब तक 38 अतिक्रमणकर्ताओं की पहचान कर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। निगम ने कहा कि अंतिम कार्रवाई सुनवाई के बाद की जाएगी।
एनजीटी ने 7 अक्टूबर 2025 के अपने पूर्व आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप अवैध निर्माणों की पहचान और निष्कासन प्रक्रिया अपनाई जाए।
‘पब्लिक ट्रस्ट सिद्धांत’ का हवाला
बेंच ने अपने आदेश में ‘पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन’ (सार्वजनिक न्यास सिद्धांत) का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधन जनता की संपत्ति हैं, जिनकी रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।
अदालत ने टिप्पणी की — “कानून की रक्षा करने वाले स्वयं कानून का उल्लंघन न करें।”
कलेक्टर की निगरानी में होगी कार्रवाई
एनजीटी ने भोपाल कलेक्टर को आदेश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस कार्रवाई की निगरानी करें और सुनिश्चित करें कि वेटलैंड क्षेत्र से सभी अतिक्रमण निर्धारित समय में हटा दिए जाएँ।
मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
इज्तेमा तैयारियों के बीच भटका आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम प्रस्ताव
भोपाल नगर निगम द्वारा तैयार आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की ड्राफ्ट योजना पर समीक्षा प्रक्रिया इज्तेमा की तैयारियों के कारण फिलहाल टल गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी शहरी निकायों को 13 जनवरी 2026 तक शेल्टर होम निर्माण पूरा करने का निर्देश दिया था। इसके बाद बीएमसी ने तीन दिन पहले ड्राफ्ट योजना तैयार की थी, लेकिन 14 नवंबर से शुरू हो रहे वार्षिक इज्तेमा के चलते प्रशासनिक बैठक स्थगित कर दी गई।
बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, समीक्षा बैठक अब 17 नवंबर के बाद होगी, जिसमें प्रस्तावित स्थल का चयन किया जाएगा। उसके बाद जमीन की स्थिति और स्वामित्व की जांच कर निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया तय होगी।
बीएमसी कमिश्नर संस्कृति जैन ने कहा, “इस समय शहर का पूरा प्रशासन इज्तेमा की तैयारियों में लगा है, लेकिन शेल्टर होम योजना को प्राथमिकता के साथ जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा।”
