सड़क हादसों पर लगाम के लिए राज्य सरकार बनाएगी ‘लीड एजेंसी’, सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी के निर्देश पर पहल
🛣️ सड़क सुरक्षा के लिए राज्य में नई एजेंसी का गठन प्रस्तावित सड़क हादसों को रोकने और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए...
🛣️ सड़क सुरक्षा के लिए राज्य में नई एजेंसी का गठन प्रस्तावित
सड़क हादसों को रोकने और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार एक ‘लीड एजेंसी’ का गठन करने जा रही है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
इस एजेंसी के गठन के साथ ही “रोड सेफ्टी कमिश्नर” का नया पद सृजित किया जाएगा, जिसके लिए अतिरिक्त सचिव स्तर के IAS अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा।
🏛️ कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा गठन
परिवहन विभाग ने लीड एजेंसी के गठन के लिए कैबिनेट को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर ली है। मंजूरी मिलने के बाद यह एजेंसी औपचारिक रूप से काम शुरू करेगी।
इस एजेंसी का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों को कम करना, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सशक्त बनाना, और सड़क सुरक्षा से जुड़ी नीतियों का समन्वय करना होगा।
🗣️ सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी की पहल से मिली गति
इस वर्ष जुलाई में रोड सेफ्टी कमेटी के अध्यक्ष अभय मनोहर सप्रे ने राज्य का दौरा किया था। उनकी मुख्य सचिव अनुराग जैन से हुई बैठक में लीड एजेंसी के गठन पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
बैठक के बाद से एजेंसी के गठन की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ा है।
👮♂️ एजेंसी में कई विभागों का समन्वय
लीड एजेंसी के तहत रोड सेफ्टी कमिश्नर के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी तैनात होंगे —
-
राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी
-
स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि
-
पुलिस अधिकारी
-
नगर निकाय और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी
ये सभी अधिकारी प्रतिनियुक्ति (deputation) पर एजेंसी में अपनी सेवाएं देंगे।
एजेंसी में लगभग 20 अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत रहेंगे, जो सड़क हादसों को कम करने की रणनीति पर काम करेंगे।
🚦 एजेंसी के प्रमुख कार्य और जिम्मेदारियां
लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगी, जिनमें शामिल हैं —
-
ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटनाग्रस्त स्थानों) की पहचान और सुधार
-
हेलमेट और सीटबेल्ट न पहनने वालों के खिलाफ निगरानी
-
नशे में ड्राइविंग और तेज गति से चलने पर नियंत्रण
-
आवारा पशुओं से होने वाले हादसों की रोकथाम
-
लाइसेंस प्रणाली में सुधार
-
दुर्घटना के बाद गोल्डन आवर (पहला घंटा) में राहत और बचाव कार्य को तेज करना
इसके साथ ही ‘राहवीर योजना’ को भी व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा ताकि आम लोग सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों की सहायता के लिए आगे आ सकें।
💬 राज्य प्रशासन का फोकस: “सड़क सुरक्षा अब विकास एजेंडा का हिस्सा”
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सड़क सुरक्षा अब केवल ट्रैफिक का मुद्दा नहीं बल्कि जनजीवन और विकास से जुड़ा प्राथमिक क्षेत्र बन चुका है।
राज्य सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में सड़क हादसों की दर में कम से कम 30% की कमी लाने का है।
