मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में फर्जी कर्मचारियों पर सख्ती: तीन दिन में मांगा पूरा ब्योरा, आधार-फेस अटेंडेंस सिस्टम से उजागर हुआ बड़ा घोटाला
मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (UAD) ने राज्य के सभी 413 नगरीय निकायों से कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और वेतन व्यय का...
मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (UAD) ने राज्य के सभी 413 नगरीय निकायों से कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और वेतन व्यय का विस्तृत विवरण तीन दिन में मांगा है। यह कदम उन हज़ारों संदिग्ध या फर्जी कर्मचारियों के खुलासे के बाद उठाया गया है, जो हाल ही में लागू किए गए आधार आधारित फेस अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) से उजागर हुए।
🧾 तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगमों, परिषदों और नगर पंचायतों के आयुक्तों व मुख्य नगर अधिकारियों को आदेश जारी किया है कि वे यह बताएं —
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आधार-फेस अटेंडेंस सिस्टम लागू होने के बाद कितने कर्मचारी सूची से हटाए गए,
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और इस प्रक्रिया से हर माह कितनी वेतन बचत हो रही है।
विभाग ने यह जानकारी निर्धारित प्रारूप में तीन दिनों के भीतर भेजने के निर्देश दिए हैं।
📱 नया सिस्टम: चेहरे और GPS से उपस्थिति की निगरानी
UAD के अनुसार, प्रदेशभर में 1.39 लाख कर्मचारियों ने आधार-सक्षम फेस अटेंडेंस सिस्टम में पंजीकरण कराया है। यह प्रणाली GPS तकनीक के ज़रिए कर्मचारियों की उपस्थिति कार्यालय के 30 मीटर दायरे में ही दर्ज करती है, जिससे फर्जी उपस्थिति लगाना लगभग असंभव हो गया है।
इस प्रणाली की अंतिम पंजीकरण तिथि 31 अक्टूबर थी।
🚨 भोपाल नगर निगम में 3,000 से अधिक संदिग्ध कर्मचारी
सबसे बड़ा खुलासा भोपाल नगर निगम (BMC) में हुआ है, जहाँ 3,000 से अधिक फर्जी या संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान की गई है।
‘फ्री प्रेस’ की एक रिपोर्ट (1 नवंबर) के अनुसार, जहाँ विभागीय रिकॉर्ड में भोपाल निगम के 19,854 कर्मचारी दर्ज हैं, वहीं निगम का दावा है कि वास्तविक संख्या लगभग 16,000 है।
इस अंतर ने राज्य सरकार को पूरे सिस्टम की जाँच के लिए प्रेरित किया।
💼 पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम
UAD अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नगरीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “पहली बार सभी निकायों के वेतन भुगतान और उपस्थिति को आधार और GPS प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे फर्जी भुगतान और ‘घोस्ट एम्प्लॉयीज़’ की समस्या पर अंकुश लगेगा।”
🔍 आगे की प्रक्रिया और संभावित कार्रवाई
विभाग तीन दिनों में सभी 413 निकायों से डेटा प्राप्त कर उसकी तुलना डिजिटल उपस्थिति रिकॉर्ड से करेगा।
अगर किसी निकाय में गड़बड़ी या फर्जी कर्मचारियों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना है।
