नेपाल: जेन ज़ी विरोध प्रदर्शन पर कार्रवाई के मामले में पूर्व पीएम ओली गिरफ्तार; लापरवाही के आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के नेता बालकृष्ण लेहक को जेन ज़ी विरोध प्रदर्शन पर कार्रवाई के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया।
मुख्य बातें:
- क्या हुआ: पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के नेता बालकृष्ण लेहक को जेन ज़ी विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के संबंध में गिरफ्तार किया गया।
- महत्व क्यों: गिरफ्तारियां पिछली शिकायतों को दूर करने और अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने के लिए नई सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करती हैं।
- लोगों के लिए क्या बदलाव: लापरवाही का दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक की जेल हो सकती है। जांच आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन से सरकारी नीति में बदलाव का संकेत मिलता है।
- कौन प्रभावित: केपी शर्मा ओली, बालकृष्ण लेहक, चंद्र कुबेर खापुंग, पीड़ितों के परिवार और सीपीएन-यूएमएल के सदस्य।
जेन ज़ी विरोध प्रदर्शनों की जांच के बाद गिरफ्तारियां
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के नेता बालकृष्ण लेहक को शनिवार सुबह गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारियां जेन ज़ी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई पर जांच आयोग की रिपोर्ट से संबंधित हैं।
जेन ज़ी विरोध प्रदर्शनों के कारण ओली सरकार का तख्ता पलट हो गया था। लेहक उस समय गृह मंत्री थे।
लापरवाही के आरोप और आयोग के निष्कर्ष
एक आयोग ने 8 और 9 सितंबर की घटनाओं की जांच की। इसने ओली और लेहक पर लापरवाही से हत्याओं के लिए मुकदमा चलाने की सिफारिश की। आयोग ने कहा कि वे घातक पुलिस फायरिंग को रोकने में विफल रहे।
आयोग की रिपोर्ट 8 मार्च को निवर्तमान सरकार को सौंपी गई थी। रिपोर्ट बुधवार को मीडिया में लीक हो गई।
नई सरकार ने तेजी से कार्रवाई की
5 मार्च को आरएसपी की जीत के बाद, श्री. शाह ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके तुरंत बाद, उन्होंने सुधन गुरुंग को गृह मंत्री नियुक्त किया। गुरुंग, जेन ज़ी विरोध प्रदर्शनों में एक प्रमुख व्यक्ति थे, जिन्होंने अक्टूबर में ओली और लेहक के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।
27 मार्च, 2026 को अपनी पहली बैठक में, शाह मंत्रिमंडल ने जांच आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया। शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने निर्णय की पुष्टि की। संबंधित एजेंसियों को आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस परामर्श और संभावित जेल का समय
गृह मंत्री गुरुंग ने शुक्रवार रात पुलिस प्रमुखों के साथ परामर्श किया। इसके बाद शनिवार को ओली और लेहक की गिरफ्तारियां हुईं।
आयोग ने पूर्व पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग पर भी मुकदमा चलाने की सिफारिश की। दोषी पाए जाने पर, ओली, लेहक और खापुंग को 10 साल तक की जेल हो सकती है।
चेतावनी और चिंताएं
रिपोर्ट के अचानक जारी होने से नई सरकार की कार्रवाइयों के बारे में चिंताएं बढ़ गईं। शुक्रवार की रात, सीपीएन-यूएमएल ने ओली को गिरफ्तार करने पर "परिणामों" की चेतावनी दी।
आगे क्या देखना है
ओली, लेहक और खापुंग के खिलाफ कानूनी कार्यवाही पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। ओली की सीपीएन-यूएमएल पार्टी और उसके समर्थकों की प्रतिक्रिया भी आने वाले हफ्तों में एक महत्वपूर्ण कारक होगी।
