आरटीआई कार्यकर्ता पर जानलेवा हमला: बेरसिया में छह अज्ञात हमलावरों ने की लाठी-डंडों से पिटाई, बाल-बाल बची जान
🔹 बाइक रोककर किया हमला, बचने के लिए छोड़नी पड़ी मोटरसाइकिल घटना सोमवार शाम करीब 5 बजे की है। पीड़ित दीप सिंह विश्वकर्मा (37), निवासी...
🔹 बाइक रोककर किया हमला, बचने के लिए छोड़नी पड़ी मोटरसाइकिल
घटना सोमवार शाम करीब 5 बजे की है। पीड़ित दीप सिंह विश्वकर्मा (37), निवासी हिनोटिया जागीर गांव, फर्नीचर व्यवसायी और आरटीआई कार्यकर्ता हैं।
उन्होंने बताया कि जब वे इमलिया स्वरूप गांव के पास निर्माणाधीन बायपास से घर लौट रहे थे, तभी चार मोटरसाइकिलों पर सवार लगभग छह लोगों ने उन्हें घेर लिया और लाठी-डंडों से हमला शुरू कर दिया।
दीप ने बताया,
“मैं किसी तरह बाइक छोड़कर पास के गांव की ओर भागा, लेकिन तब तक मेरे हाथ, पैर और सिर पर कई वार हो चुके थे। मेरा हाथ टूट गया और पैर में गंभीर चोट आई। अगर हेलमेट नहीं पहना होता तो सिर पर लगी चोट जानलेवा हो सकती थी।”
🔹 “हमलावरों को मारने के लिए भेजा गया था”
पीड़ित ने दावा किया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और हमलावरों को उसकी हत्या के लिए भेजा गया था।
उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने साजिश रची, वह पास में कार में बैठा था और
“उसने अपने लोगों को मुझे मारने का इशारा किया और फिर कार लेकर फरार हो गया।”
हमले के बाद दीप सिंह ने डायल-112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां उनके हाथ की सर्जरी की गई।
🔹 पहले भी जताई थी हमले की आशंका
दीप सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले भी पुलिस को लिखित शिकायत देकर संभावित हमले की आशंका जताई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उनका कहना है कि वे कई आरटीआई आवेदन और स्थानीय भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण कुछ लोगों से दुश्मनी हो गई थी।
🔹 पुलिस जांच में जुटी
बेरसिया थाना प्रभारी वीरेन्द्र सेन ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
“पीड़ित के आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
अभी तक पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है, लेकिन जांच प्रारंभ कर दी गई है।
🔹 क्षेत्र में दहशत, सुरक्षा पर सवाल
घटना के बाद बेरसिया क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम के समय बायपास रोड पर पुलिस गश्त बहुत कम होती है, जिससे बदमाशों के हौसले बुलंद हैं।
🗞️ निष्कर्ष:
आरटीआई कार्यकर्ता पर यह हमला न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सूचना के अधिकार के तहत सक्रिय लोगों को अब भी सुरक्षा की जरूरत है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
