बांग्रासिया–भोजपुर रोड पर पेड़ों की कटाई पर रोक जारी, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
🔹 हाईकोर्ट का सख्त रुख, पेड़ों की कटाई पर लगी रोक बढ़ी भोपाल/जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच — जिसमें मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा...

🔹 हाईकोर्ट का सख्त रुख, पेड़ों की कटाई पर लगी रोक बढ़ी
भोपाल/जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच — जिसमें मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय साराफ शामिल हैं — ने मंगलवार को बांग्रासिया–भोजपुर रोड चौड़ीकरण परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर लगी अस्थायी रोक को आगे बढ़ा दिया।
यह आदेश उस स्वतः संज्ञान याचिका (suo motu petition) की सुनवाई के दौरान आया, जो टाइम्स ऑफ इंडिया की 28 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि रायसेन जिले के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सड़क चौड़ी करने के लिए दोनों ओर 488 पेड़ काट दिए, जो कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन था।
🔹 NGT का आदेश और सरकार की जवाबदेही
NGT की भोपाल पीठ ने पहले ही यह निर्देश दिया था कि किसी भी परियोजना में 25 से अधिक पेड़ तभी काटे जा सकते हैं, जब केंद्रीय सक्षम समिति (CEC) से अनुमति प्राप्त हो।
राज्य सरकार ने इसी आदेश के पालन में सितंबर 2025 में 9 सदस्यीय समिति गठित की थी, जिसकी अध्यक्षता नगरीय प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कर रहे हैं।
हालांकि, अदालत ने पाया कि सरकार और PWD द्वारा दिए गए हलफनामे में दावा किया गया था कि पेड़ "काटे नहीं, बल्कि स्थानांतरित" किए गए हैं।
लेकिन अदालत में प्रस्तुत फोटोग्राफिक साक्ष्य बताते हैं कि —
“किसी भी पेड़ का वास्तविक ट्रांसलोकेशन नहीं हुआ। पेड़ों को पूरी तरह काटकर उनके तनों को मिट्टी में दबा दिया गया, जिनमें से कुछ में नई कलियाँ फूटने लगी हैं।”
🔹 पुरातत्व विभाग को भी नोटिस
पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सक्सेना की याचिका को अदालत ने इंटरवीनर के रूप में स्वीकार किया। उनके वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने यह तर्क दिया कि जिस क्षेत्र में पेड़ काटे गए हैं, वह परमार कालीन मिट्टी के बांध के पास है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्थल है।
अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए ASI को नोटिस जारी किया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संरक्षित क्षेत्र में कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है।
🔹 अदालत के नए निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और PWD को आदेश दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले —
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स्थानांतरित किए गए बताए जा रहे 253 पेड़ों के जीपीएस लोकेशन सहित फोटोग्राफ्स प्रस्तुत करें।
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यह स्पष्ट करें कि 23 मई 2025 को MP रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन बनाम नितिन सक्सेना मामले में NGT द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में कौन-से कदम उठाए गए हैं।
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यह बताएं कि राज्य में ट्री प्लांटेशन पॉलिसी लागू है या नहीं, और यदि नहीं है, तो उसे बनाने के लिए क्या पहल की गई है।
🔹 पर्यावरणीय दृष्टि से अहम मामला
इस मामले ने एक बार फिर राज्य में पर्यावरणीय मंजूरी और पेड़ संरक्षण नीतियों की कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय क्षति और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
पर्यावरणविदों के अनुसार, यदि राज्य स्तर पर सस्टेनेबल रोड डेवलपमेंट पॉलिसी तैयार नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में हरित क्षेत्र लगातार घटते रहेंगे।
🔹 अगली सुनवाई 20 नवंबर को
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर 2025 को निर्धारित की है और कहा है कि तब तक पेड़ों की कटाई पर लगी रोक जारी रहेगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अगली सुनवाई में यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो राज्य सरकार पर जवाबदेही तय की जा सकती है।
🗞️ निष्कर्ष:
बांग्रासिया–भोजपुर रोड परियोजना पर अदालत का रुख साफ है — विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। यह मामला मध्य प्रदेश में पर्यावरणीय जवाबदेही और नीति निर्माण की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।
