भोपाल के अब्दुल मुआज़ ने सीए फाइनल परीक्षा में किया टॉप, बोले – “लगातार मेहनत ही मेरी सफलता का मंत्र”
📊 भोपाल केंद्र का शानदार प्रदर्शन इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने सोमवार को सीए फाइनल परीक्षा के नतीजे घोषित किए, जिसमें भोपाल...

📊 भोपाल केंद्र का शानदार प्रदर्शन
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने सोमवार को सीए फाइनल परीक्षा के नतीजे घोषित किए, जिसमें भोपाल केंद्र ने 26.25% पास प्रतिशत के साथ राष्ट्रीय औसत 23.45% से बेहतर प्रदर्शन किया।
भोपाल केंद्र में अब्दुल मुआज़ (67.50%) ने शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि साद खान (67.33%), श्वेता धाकड़ (61.33%), साहिल अंजने (60.33%) और शिरीन सैफी (59.67%) क्रमशः दूसरे से पाँचवें स्थान पर रहे।
🏆 टॉपर अब्दुल मुआज़: “पहली कोशिश में उम्मीद थी पास होने की, टॉप करने की नहीं”
अब्दुल मुआज़, जो भोपाल के जहांगीराबाद क्षेत्र के निवासी हैं, ने अपनी पहली ही कोशिश में यह सफलता हासिल की।
“मुझे उम्मीद थी कि मैं पास हो जाऊंगा, लेकिन टॉप करने का सोचा नहीं था,” उन्होंने कहा।
मुआज़ ने बताया कि वे रोज़ाना 8–12 घंटे की सेल्फ-स्टडी करते थे। परिवार के साथ समय बिताना उन्हें तनाव से राहत देता था।
“लगातार अभ्यास और अनुशासन मेरा सफलता मंत्र है।”
अब्दुल के पिता अब्दुल महबूब बीएचईएल में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माँ शाहनीला महबूब गृहिणी हैं। मुआज़ अपने परिवार के पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और फरवरी में आर्टिकलशिप पूरी करने के बाद नौकरी करने की योजना बना रहे हैं।
💼 साद खान: “रीविज़न ही मेरा सफलता का मंत्र”
साद खान ने भी अपनी पहली कोशिश में 67.33% अंक प्राप्त किए। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान वे रोज़ाना 10–12 घंटे पढ़ाई करते थे।
“मुझे एक-दो विषयों में संदेह था, लेकिन निरंतर रीविज़न ने आत्मविश्वास बढ़ाया।”
साद के पिता वसीम खान व्यवसायी हैं और माँ सबनम खान गृहिणी। वह अब टैक्स कंसल्टेंसी का अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
“इंस्टाग्राम पर कुछ समय बिताना और परिवार से बात करना मेरा स्ट्रेस बस्टर था,” उन्होंने मुस्कराते हुए कहा।
👩🎓 श्वेता धाकड़: “13-14 घंटे रोज़ पढ़ाई की, उम्मीद थी अच्छे परिणाम की”
श्वेता धाकड़ रायसेन जिले के उदयपुरा की रहने वाली हैं। उन्होंने चार साल में कोर्स पूरा किया और अपनी पहली ही कोशिश में सफलता पाई।
“मैं हर दिन 13–14 घंटे पढ़ती थी। जब तनाव होता था, तो छोटी नींद ले लेती या दोस्तों से बात कर लेती।”
उनके पिता दारा सिंह धाकड़ व्यवसायी हैं और माँ संध्या धाकड़ गृहिणी।
“निरंतरता और दृढ़ निश्चय ही मेरी सफलता का राज है,” श्वेता ने कहा।
👨🏫 साहिल अंजने: “शिक्षा क्षेत्र में बनाना चाहता हूँ करियर”
साहिल अंजने ने अपनी तीसरी कोशिश में सफलता हासिल की। उन्होंने बताया कि वे रोज़ाना 10 घंटे पढ़ाई करते थे और तनाव दूर करने के लिए टहलने या गैर-सीए दोस्तों से बात करने का सहारा लेते थे।
“मुझे पढ़ाने में रुचि है, इसलिए मैं अकादमिक क्षेत्र में करियर बनाना चाहता हूँ।”
साहिल के पिता शिव शंकर अंजने कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्टर हैं और माँ शिव कुमारी अंजने गृहिणी हैं।
👩💼 शिरीन सैफी: “परिवार और दोस्तों से बात करना ही मेरा स्ट्रेस रिलीफ था”
शिरीन सैफी ने पहली कोशिश में ही सफलता हासिल की और 59.67% अंक प्राप्त किए।
“परिणाम मेरी उम्मीदों से कहीं बेहतर रहा। मैं परिवार की पहली चार्टर्ड अकाउंटेंट हूँ।”
वे रोज़ाना 10–12 घंटे की पढ़ाई करती थीं और तनाव कम करने के लिए परिवार और दोस्तों से बातचीत करती थीं।
शिरीन के पिता जोहेर सैफी व्यवसायी हैं और माँ अमीना सैफी गृहिणी।
“लगातार अभ्यास और सकारात्मक सोच से ही यह मुकाम पाया,” उन्होंने कहा।
🎓 निष्कर्ष
भोपाल केंद्र के इन युवाओं की सफलता यह दर्शाती है कि निरंतर अभ्यास, आत्मअनुशासन और परिवार का सहयोग ही किसी भी कठिन परीक्षा को पार करने की कुंजी है। ये युवा अब न केवल अपने परिवारों के लिए गर्व का कारण बने हैं, बल्कि अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
