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भोपाल नगर निगम के कर्मचारी डेटा में बड़ा अंतर उजागर: आधार-आधारित फेस अटेंडेंस सिस्टम से खुली पोल

आधार-सक्षम ई-फेस अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) के लागू होने के बाद भोपाल नगर निगम (BMC) के कर्मचारी आंकड़ों में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। नगरीय प्रशासन...

Nov 2
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भोपाल नगर निगम के कर्मचारी डेटा में बड़ा अंतर उजागर: आधार-आधारित फेस अटेंडेंस सिस्टम से खुली पोल

आधार-सक्षम ई-फेस अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) के लागू होने के बाद भोपाल नगर निगम (BMC) के कर्मचारी आंकड़ों में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास (UAD) विभाग के अनुसार निगम के 19,854 कर्मचारी सिस्टम में पंजीकृत हैं, जबकि निगम का कहना है कि सिर्फ 16,000 कर्मचारी ही वास्तविक रूप से कार्यरत हैं। करीब 3,000 संदिग्ध प्रविष्टियाँ अब जांच के घेरे में हैं।


डिजिटल उपस्थिति प्रणाली ने खोले आंकड़ों के पेंच

मध्यप्रदेश के सभी 413 नगरीय निकायों में लागू आधार-सक्षम बायोमेट्रिक प्रणाली का उद्देश्य कर्मचारियों की उपस्थिति में पारदर्शिता लाना और हेराफेरी रोकना है।
UAD के अनुसार, राज्यभर के 1,39,608 कर्मचारियों ने अब तक इस डिजिटल सिस्टम में पंजीकरण कराया है। यह सिस्टम GPS-सक्षम फेस रिकग्निशन तकनीक पर आधारित है, जो कार्यालय की निर्धारित 30 मीटर सीमा के भीतर कर्मचारी की मौजूदगी को सत्यापित करता है।

हालांकि, भोपाल नगर निगम के आंकड़ों ने विभाग को चौंका दिया। पंजीकरण की अंतिम तारीख से पहले कुछ ही दिनों में कर्मचारियों की संख्या 16,000 से बढ़कर 19,854 तक पहुँच गई। इस अचानक उछाल ने “फर्जी नामों, दोहराव या गलत प्रविष्टियों” की संभावना को जन्म दिया है।


निगम के भीतर विरोधाभास

निगम के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में करीब 12,000 कर्मचारी रोजाना नए डिजिटल सिस्टम से उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। शेष कर्मचारी या तो स्मार्टफोन की अनुपलब्धता या तकनीकी दिक्कतों के कारण इससे जुड़ नहीं पाए हैं।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भोपाल नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त वरुण अवस्थी ने कहा कि “फर्जी कर्मचारियों” की बात भ्रामक है। उनके अनुसार, “कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी डुप्लिकेट रजिस्ट्रेशन, सेवानिवृत्ति या ट्रांसफर जैसी वजहों से हुई होगी।” उन्होंने बताया कि निगम जल्द ही री-वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू करेगा, जिसमें सभी पंजीकृत कर्मचारियों की पहचान दोबारा जांची जाएगी।


पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कदम

UAD अधिकारियों ने फ्री प्रेस से कहा कि AEBAS प्रणाली का मकसद नगरीय निकायों में कर्मचारी उपस्थिति को पूरी तरह पारदर्शी बनाना और “घोस्ट कर्मचारियों” की समस्या को समाप्त करना है।
यह प्रणाली जीपीएस-आधारित लोकेशन ट्रैकिंग और फेस रिकग्निशन के जरिए सुनिश्चित करेगी कि कर्मचारी वास्तविक कार्यस्थल पर ही मौजूद हों।


राज्यभर के 16 नगर निगमों में स्थिति

(31 अक्टूबर तक आधार-सक्षम ई-फेस अटेंडेंस सिस्टम में पंजीकृत कर्मचारियों की संख्या – डेटा स्रोत: UAD विभाग)

नगर निगमपंजीकृत कर्मचारी
भोपाल19,854
इंदौर18,327
ग्वालियर11,420
जबलपुर10,912
उज्जैन8,342
सागर7,215
रीवा6,890
छिंदवाड़ा6,475
रतलाम5,980
कटनी5,512
मुरैना5,203
देवास4,765
खरगोन4,312
दमोह4,011
सिंगरौली3,876
बुरहानपुर3,694

(आंकड़े विभागीय संकलन से लिए गए हैं; अंतिम सत्यापन प्रक्रिया जारी है)