मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर सीएम मोहन यादव ने खुद छापा ‘बाघ प्रिंट’ — युवा शिल्पी मोहम्मद बिलाल खत्री से की खास मुलाकात
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मध्यप्रदेश के 70वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की प्राचीन कला और हस्तशिल्प...

भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मध्यप्रदेश के 70वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की प्राचीन कला और हस्तशिल्प परंपरा को नई पहचान देने का संदेश दिया। उन्होंने मशहूर बाघ प्रिंट कला के युवा शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री के स्टॉल पर पहुँचकर स्वयं लकड़ी के ब्लॉक से पारंपरिक ‘गेंदा फूल’ डिज़ाइन छापा — और उस पर अपना हस्ताक्षर कर इस सदियों पुरानी कला के सम्मान का प्रतीक प्रस्तुत किया।
बाघ प्रिंट: परंपरा और नवाचार का संगम
स्थापना दिवस पर आयोजित प्रदर्शनी में राज्य के हस्तशिल्प, वस्त्र और स्थानीय उद्योगों के स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने युवा बाघ प्रिंट शिल्पी मोहम्मद बिलाल खत्री के स्टॉल का दौरा किया, तो उन्होंने इस कला की सूक्ष्मता और रंग संयोजन की सराहना की।
बिलाल ने मुख्यमंत्री को बाघ प्रिंट की पारंपरिक प्रक्रिया से परिचित कराया — जिसमें प्राकृतिक रंग, लकड़ी के ब्लॉक और सूक्ष्म हाथकला का मेल होता है।
मुख्यमंत्री ने मौके पर खुद लकड़ी के ब्लॉक से कपड़े पर छाप लगाई और कहा, “यह न केवल कला है, बल्कि मध्यप्रदेश की आत्मा का रंग है।”
सम्मान और संवाद
बिलाल खत्री ने मुख्यमंत्री का स्वागत एक पारंपरिक stole ओढ़ाकर किया। इसके बाद दोनों के बीच लंबे समय तक बातचीत हुई, जिसमें मुख्यमंत्री ने बाघ प्रिंट कलाकारों के योगदान को “मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत धरोहर” बताया।
मोहम्मद बिलाल खत्री पिछले 28 वर्षों से इस कला से जुड़े हैं। उन्हें 2016 में यूनेस्को एवं वर्ल्ड क्राफ्ट काउंसिल अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस और 2017 में भारत सरकार का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। वे अपने पिता, मशहूर शिल्पकार यूसुफ खत्री के साथ मिलकर बाघ प्रिंट को अमेरिका, जर्मनी, जापान, रूस, स्पेन, चीन, फ्रांस और ईरान जैसे 30 से अधिक देशों में प्रदर्शित कर चुके हैं।
“यह सिर्फ मेरे लिए नहीं, पूरे शिल्प समुदाय के लिए गौरव का क्षण”
मुलाकात के बाद बिलाल खत्री ने कहा, “मुख्यमंत्री द्वारा बाघ प्रिंट छापना हमारे लिए प्रेरणादायक क्षण था। उन्होंने गेंदा फूल की छाप लगाकर उस पर हस्ताक्षर किए — मैं इसे फ्रेम कर जीवनभर सहेजकर रखूंगा।”
उन्होंने आगे कहा कि यह पहल सभी कारीगरों को नए उत्साह के साथ अपनी कला को वैश्विक मंच तक ले जाने की प्रेरणा देगी।
सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री की इस प्रतीकात्मक पहल से न केवल बाघ प्रिंट बल्कि प्रदेश के अन्य हस्तशिल्पों को भी वैश्विक पहचान मिलेगी। कला और संस्कृति विभाग ने भी संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार पारंपरिक हस्तशिल्पों के लिए एक समर्पित “एमपी हैंडलूम प्रमोशन मिशन” शुरू करने की दिशा में काम कर रही है।
