भोपाल नगर निगम की बैठक में हंगामा: प्रतिनियुक्ति समाप्त करने की मांग पर भाजपा-कांग्रेस एकजुट, जल आपूर्ति परियोजना पर भी टकराव
भोपाल नगर निगम (BMC) की गुरुवार को आईएसबीटी परिसर में हुई परिषद बैठक में प्रतिनियुक्ति, भर्ती प्रक्रिया और टेंडर प्रणाली को लेकर पार्षदों के बीच...

भोपाल नगर निगम (BMC) की गुरुवार को आईएसबीटी परिसर में हुई परिषद बैठक में प्रतिनियुक्ति, भर्ती प्रक्रिया और टेंडर प्रणाली को लेकर पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद मो. अज़ीज़ ने प्रतिनियुक्त अधिकारियों — अतिरिक्त आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान और सहायक आयुक्त एकता अग्रवाल — को उनके मूल विभागों में वापस भेजने की मांग उठाई। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस मांग को भाजपा पार्षदों ने भी समर्थन दिया और प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की बात कही।
प्रतिनियुक्ति व्यवस्था खत्म करने की मांग पर सहमति
मो. अज़ीज़ की इस मांग पर भाजपा पार्षद सुरेंद्र वादिका और कांग्रेस पार्षद मो. सरवर ने भी सहमति जताई। उनका कहना था कि प्रतिनियुक्त अधिकारी स्थानीय प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही से बच निकलते हैं और कार्यकुशलता प्रभावित होती है।
इस पर आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि “सरकारी नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
बैठक की अध्यक्षता नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने की, जिन्होंने कहा कि यह एक नीतिगत मुद्दा है और इसे परिषद में औपचारिक रूप से चर्चा के लिए रखा जाएगा।
जल आपूर्ति परियोजना पर टकराव
बैठक के दूसरे चरण में बांदीखेड़ी स्थित ईएमसी फैक्ट्री को 2 एमएलडी पानी आपूर्ति के प्रस्ताव पर तीखी बहस हुई।
कांग्रेस पार्षद देवंशु कंसाना ने इस परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव ऊपरी झील पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। उन्होंने रविवार को प्रकाशित एक अखबार रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि परियोजना से जलस्तर प्रभावित हो सकता है।
हालांकि विरोध के बावजूद, यह प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष शबीस्ता ज़ाकी ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव अधूरा है और इसमें भूमि आवंटन व पारदर्शिता की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS)-2025 के दौरान हुए खर्चों में भ्रष्टाचार की भी जांच की मांग की।
भर्ती प्रक्रिया और टेंडर प्रणाली पर सवाल
भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने निगम की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि “निगम अब अधिकारियों की परिषद बन गया है।”
उनका साथ पार्षद रविंद्र याति ने भी दिया, जिन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्तियां MIC (मेयर-इन-काउंसिल) की मंजूरी के बिना हो रही हैं।
बैठक में कई पार्षदों ने शिकायत की कि छोटे कार्यों और त्योहारों की तैयारियों में भी टेंडर प्रक्रिया की जटिलता के कारण देरी हो रही है।
अध्यक्ष सूर्यवंशी ने आश्वासन दिया कि प्रक्रिया को सरल बनाने और कार्यों की समयसीमा सुनिश्चित करने पर विचार किया जाएगा।
बस सेवा पर चिंता, दिसंबर तक सुधार का वादा
कांग्रेस पार्षद योगेंद्र चौहान ने शहर की बस सेवा की दुर्दशा पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि नगर निगम की बसों की संख्या घटकर 368 से सिर्फ 60 परिचालन बसों तक रह गई है।
इस पर MIC सदस्य मनोज राठौर ने कहा कि “जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से स्थिति में सुधार आएगा।”
आयुक्त संस्कृति जैन, जिन्होंने पदभार संभालने के बाद पहली बार परिषद बैठक में भाग लिया, ने बताया कि बस ऑपरेटर Incubator ने एक माह में 40 बसें फिर से चालू करने का आश्वासन दिया है।
कांग्रेस पार्षदों का प्रदर्शन
बैठक के अंत में कांग्रेस पार्षदों ने शहर की खराब सड़कों के खिलाफ मंच के सामने प्लाकार्ड लेकर प्रदर्शन किया और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
निष्कर्ष
गुरुवार की बैठक ने एक ओर जहां राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रतिनियुक्ति व्यवस्था पर सर्वदलीय सहमति दिखाई, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए।
अब देखना यह होगा कि आयुक्त संस्कृति जैन के नेतृत्व में निगम प्रशासन इन मुद्दों पर कितनी तेजी से सुधारात्मक कदम उठाता है।
