भोपाल मेट्रो प्रायोरिटी कॉरिडोर का निरीक्षण पूरा: सीएमआरएस निरीक्षण से पहले तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश
सीएमआरएस निरीक्षण से पहले मैदान में उतरे अधिकारी भोपाल मेट्रो परियोजना अपने संचालन के निर्णायक चरण में पहुंच गई है। शनिवार को मध्यप्रदेश मेट्रो रेल...

सीएमआरएस निरीक्षण से पहले मैदान में उतरे अधिकारी
भोपाल मेट्रो परियोजना अपने संचालन के निर्णायक चरण में पहुंच गई है। शनिवार को मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के प्रबंध निदेशक एस. कृष्ण चैतन्य ने प्रायोरिटी कॉरिडोर का निरीक्षण किया।
यह निरीक्षण एआईआईएमएस भोपाल से डीआरएम ऑफिस मेट्रो स्टेशन तक किया गया। आगामी सप्ताह में कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) के संभावित दौरे को देखते हुए यह मूल्यांकन विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
यात्री सुविधाओं और सुरक्षा पर मुख्य जोर
एमपीएमआरसीएल की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चैतन्य ने सुभाष नगर से रानी कमलापति मेट्रो स्टेशन तक के खंड का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने प्रत्येक स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा, स्टेशन डिजाइन, संचालन समन्वय और यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की।
उन्होंने निर्देश दिया कि स्टेशन परिसरों में उपलब्ध स्थानों का उपयोग यात्री सुविधाओं, हरियाली, राजस्व सृजन और सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए किया जाए।
महत्त्वपूर्ण कार्यों की समयसीमा तय
निरीक्षण के दौरान चैतन्य ने सभी संबंधित ठेकेदारों और प्रणाली एकीकरण टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सीएमआरएस निरीक्षण से पहले आवश्यक सभी निर्माण और प्रणाली कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं।
इनमें लिफ्ट और एस्केलेटर की जांच, टिकट काउंटर क्षेत्र, फायर सेफ्टी सिस्टम, लाइटिंग, दिशासूचक संकेतक और स्टेशन की फिनिशिंग वर्क शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सभी घटक सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होने चाहिए ताकि संचालन में कोई तकनीकी बाधा न आए।
वरिष्ठ अधिकारियों और ठेकेदारों की उपस्थिति
निरीक्षण में एमपीएमआरसीएल के वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित ठेकेदारों के प्रतिनिधि और जनरल कंसल्टेंट के सदस्य शामिल हुए। अधिकारियों ने कहा कि यह संयुक्त प्रयास भोपाल मेट्रो को निर्धारित समय में सुरक्षित रूप से संचालन के लिए तैयार करने में मदद करेगा।
भोपाल मेट्रो: अंतिम चरण में पहुंची उम्मीदें
भोपाल मेट्रो का प्रायोरिटी कॉरिडोर लगभग 7 किलोमीटर लंबा है, जो शहर के दक्षिणी हिस्से को प्रमुख प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्रों से जोड़ता है।
सीएमआरएस की मंजूरी मिलने के बाद, कॉरिडोर पर मेट्रो परिचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह शहर के परिवहन ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
