भोपाल बना जांच एजेंसियों के रडार पर: आईएसआईएस से जुड़े आदनान की गिरफ्तारी के बाद फिर उभरी सुरक्षा चिंता
भोपाल फिर चर्चा में: चरमपंथी नेटवर्क्स का नया ठिकाना? दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाल ही में भोपाल के रहने वाले आदनान को गिरफ्तार...

भोपाल फिर चर्चा में: चरमपंथी नेटवर्क्स का नया ठिकाना?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाल ही में भोपाल के रहने वाले आदनान को गिरफ्तार किया है, जिस पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस से संबंध होने का आरोप है। इस गिरफ्तारी के बाद भोपाल एक बार फिर देश की सुरक्षा एजेंसियों के फोकस में आ गया है।
सूत्रों के अनुसार, बीते तीन वर्षों में यहां से कई ऐसे लोग गिरफ्तार किए गए हैं जो आईएसआईएस, जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) जैसे संगठनों से जुड़े पाए गए।
जांच एजेंसियों की नजर में भोपाल: "सेफ हेवन" की आशंका
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) पर कार्रवाई के बाद से कुछ अन्य प्रतिबंधित संगठन भोपाल में अपनी जड़ें फिर से जमाने की कोशिश कर रहे हैं।
तेजी से बढ़ती आबादी, किराए पर आसानी से घर मिलने और अपेक्षाकृत शांत शहरी माहौल ने शहर को इन नेटवर्क्स के लिए “सुरक्षित ठिकाना” बना दिया है।
मार्च 2022: ऐशबाग में JMB मॉड्यूल का पर्दाफाश
मार्च 2022 में मध्यप्रदेश एटीएस ने ऐशबाग इलाके से जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने यह इलाका इसलिए चुना क्योंकि यहां भीड़भाड़ और किराए के सस्ते मकान आसानी से मिल जाते हैं।
एटीएस के अनुसार, ये आरोपी राज्यभर में स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने के मिशन पर थे।
मई 2023: हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) मॉड्यूल पर तीन राज्यों में छापेमारी
9 मई 2023 को मध्यप्रदेश, तेलंगाना और छिंदवाड़ा में एक समन्वित अभियान चलाया गया जिसमें 16 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। इनमें से 10 भोपाल के थे।
जांच में सामने आया कि यह समूह भोपाल के आसपास के जंगलों में धार्मिक शिविरों के नाम पर गुप्त प्रशिक्षण शिविर चला रहा था, जहां युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया जा रहा था।
अक्टूबर 2024: खानूगांव में PFI से जुड़ाव की जांच
11 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने खानूगांव क्षेत्र में 60 वर्षीय मौलाना मुसब खान से पूछताछ की।
एजेंसी को शक था कि उनका संबंध प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से है। जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त किया गया।
जनवरी 2025: नई रेड और डिजिटल ट्रैकिंग नेटवर्क
जनवरी 2025 में एनआईए की टीमें एक बार फिर भोपाल में सक्रिय हुईं। कई स्थानों पर छापेमारी कर उन लोगों से पूछताछ की गई जो पुराने मामलों से जुड़े थे।
सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई का संबंध एन्क्रिप्टेड डिजिटल चैनलों के जरिए चल रहे स्लीपर सेल नेटवर्क से था, जिनके संकेत हाल ही में विदेश से प्राप्त हुए थे।
विशेषज्ञों की राय: “सतर्कता और साइबर मॉनिटरिंग बढ़ाने की जरूरत”
सुरक्षा विश्लेषक कर्नल (से.नि.) अरविंद तिवारी का कहना है, “भोपाल की भौगोलिक स्थिति, शिक्षा केंद्रों और रिहायशी इलाकों के विस्तार ने इसे नए स्लीपर नेटवर्क के लिए रणनीतिक ठिकाना बना दिया है। निगरानी बढ़ाना जरूरी है।”
वहीं, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि एन्क्रिप्टेड ऐप्स और डार्क वेब के जरिए संचार चैनल बनाना अब इन समूहों की प्रमुख रणनीति बन चुकी है।
निष्कर्ष: भोपाल को चाहिए सतत निगरानी और सामाजिक जागरूकता
लगातार हो रही गिरफ्तारियों और छापों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भोपाल अब केवल मध्यप्रदेश की राजधानी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक संवेदनशील केंद्र बन चुका है।
सुरक्षा एजेंसियां तकनीकी निगरानी और समुदाय-आधारित इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की चरमपंथी गतिविधि को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
