सोशल मीडिया बना जानलेवा ट्रेंड का हथियार: मध्यप्रदेश में ‘कार्बाइड गन’ से बच्चों की आंखों की रोशनी छिनी
डिजिटल जुनून बना खतरा: दिवाली पर सोशल मीडिया ट्रेंड से फैली तबाही भोपल के हमीदिया अस्पताल के एक वार्ड में आठ वर्षीय अलजैन खान बेड...

डिजिटल जुनून बना खतरा: दिवाली पर सोशल मीडिया ट्रेंड से फैली तबाही
भोपल के हमीदिया अस्पताल के एक वार्ड में आठ वर्षीय अलजैन खान बेड पर लेटा है, दोनों आंखों पर पट्टियां बंधी हैं। वह कहता है, “मैंने यूट्यूब पर वीडियो देखा और अब्बा से वैसी गन लाने की जिद की।”
अलजैन उन कई बच्चों में से एक है जो इस साल दिवाली पर ‘कार्बाइड गन’ से घायल हुए। यह उपकरण गैस और विस्फोटक मिश्रण से चलता है — और अब एक खतरनाक ‘फेस्टिव ट्रेंड’ बन चुका है।
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ ‘कार्बाइड गन चैलेंज’
जांच में सामने आया है कि इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फैले वीडियोज़ ने इस चलन को जन्म दिया। कई प्लेटफॉर्म्स पर ‘कार्बाइड गन चैलेंज’ नामक ट्रेंड वायरल हुआ, जिसमें युवाओं को घर पर ही यह हथियार बनाने के तरीके दिखाए गए।
इन वीडियोज़ में फटते धमाकों और “थ्रिल” का प्रदर्शन किया गया, जिसने खासकर किशोरों को लुभाया। बच्चे और युवा इसे खेलने के लिए खरीदने या बनाने लगे — बिना इसके खतरों को समझे।
भयावह हादसे: आंखों पर सबसे बड़ा असर
अलजैन की तरह, भोपाल के ही सातवीं कक्षा के छात्र करण पंथी ने बताया कि उसने इंस्टाग्राम पर रील देखकर गन खरीदी। जब यह नहीं चली और उसने बैरल में झांका, तभी यह फट गई। करण की एक आंख बुरी तरह जख्मी हुई और वह अभी भी हमीदिया अस्पताल में भर्ती है।
सीहोर के विकस मेवाड़ा, जो एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं, ने भी इसी तरह के हादसे का सामना किया। “मैंने वीडियो देखकर इसे आजमाया। अब धुंधला दिखाई देता है,” उन्होंने बताया।
विशेषज्ञों की चेतावनी: “डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी जरूरी”
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अमित दुबे के अनुसार, “कार्बाइड गन से निकलने वाली गैस और धुएं में कैल्शियम कार्बाइड की प्रतिक्रिया से अत्यधिक गर्मी और विषैले तत्व बनते हैं। इससे न केवल आंखें, बल्कि त्वचा और फेफड़े भी प्रभावित होते हैं।”
तकनीकी विश्लेषक और साइबर सेफ्टी विशेषज्ञ प्रवीण मिश्रा का कहना है, “यह घटना इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉडरेशन की कमी कैसे वास्तविक जीवन में खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे वीडियोज़ पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।”
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और अगला कदम
मध्यप्रदेश पुलिस साइबर सेल ने पुष्टि की है कि वे इस ‘कार्बाइड गन’ ट्रेंड से जुड़े वीडियोज़ की निगरानी कर रही है। कुछ अकाउंट्स को रिपोर्ट किया गया है और कई पोस्ट्स हटाए गए हैं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों की तत्काल रिपोर्ट की जाए और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए।
एक बड़ी सीख
डिजिटल दौर में मनोरंजन और खतरे की सीमा धुंधली होती जा रही है। ‘कार्बाइड गन’ ट्रेंड ने दिखाया है कि ऑनलाइन कंटेंट बच्चों की जिज्ञासा को जोखिम में कैसे बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों और प्लेटफॉर्म कंपनियों—दोनों की साझा जिम्मेदारी है कि इस तरह के घातक रुझानों पर रोक लगाई जाए।
निष्कर्ष:
एक क्लिक से शुरू हुआ मनोरंजन का सिलसिला अब दर्जनों परिवारों के लिए दुःस्वप्न बन गया है। भोपाल के अस्पतालों में भरी इन मासूम आंखों की कहानी एक चेतावनी है—सोशल मीडिया पर हर ट्रेंड निर्दोष नहीं होता।
