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मध्य प्रदेश: बजरंग दल ने ‘पश्चिमी अंदाज़’ की दिवाली पार्टी पर छापा मारा, वीडियो वायरल; सोशल मीडिया पर गरमाई बहस

मध्य प्रदेश से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बजरंग दल के कार्यकर्ता एक निजी विला में...

Oct 24
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मध्य प्रदेश: बजरंग दल ने ‘पश्चिमी अंदाज़’ की दिवाली पार्टी पर छापा मारा, वीडियो वायरल; सोशल मीडिया पर गरमाई बहस

मध्य प्रदेश से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बजरंग दल के कार्यकर्ता एक निजी विला में चल रही दिवाली पार्टी में घुसते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में समूह “जय श्री राम” के नारे लगाते हुए पार्टी रुकवाने की मांग करता नज़र आ रहा है।


वायरल वीडियो में क्या दिखा?

वायरल क्लिप में बड़ी संख्या में लोग विला के बाहर इकट्ठे दिखाई देते हैं। कुछ कार्यकर्ता भगवा रंग की छतरियाँ लिए हुए हैं, जबकि अंदर पार्टी चल रही है। कुछ मिनटों बाद बजरंग दल के सदस्य अंदर जाते हैं और आयोजकों से पार्टी तुरंत बंद करने को कहते हैं।

यह वीडियो इंस्टाग्राम पेज “thehighclassin” पर साझा किया गया था, जिसमें कैप्शन में इस घटना की तुलना ईरान और तालिबान जैसे देशों में होने वाली ‘मोरल पुलिसिंग’ से की गई है। पोस्ट में लिखा गया है कि “स्थानीय और राजनीतिक समूह धीरे-धीरे पुलिस और न्यायपालिका जैसी भूमिका निभाने लगे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।”


सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई यूज़र्स ने इसे निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताया। उनका कहना है कि किसी निजी आयोजन में इस तरह घुसना ‘कानून से ऊपर’ होने का संकेत है।
वहीं, कुछ लोगों ने बजरंग दल का समर्थन करते हुए कहा कि “भारतीय त्योहारों के दौरान पश्चिमी संस्कृति की नकल नहीं की जानी चाहिए।”


पुलिस की चुप्पी बनी सवाल

अब तक स्थानीय पुलिस ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है, न कि सामाजिक संगठनों का।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पार्टी में कोई अवैध गतिविधि नहीं हो रही थी, तो इस तरह का हस्तक्षेप अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन हो सकता है।


बढ़ती ‘मोरल पुलिसिंग’ पर चिंता

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हाल के वर्षों में ऐसी घटनाओं में वृद्धि पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि “त्योहारों या व्यक्तिगत आयोजनों में इस तरह की दखलअंदाजी समाज में डर और विभाजन को बढ़ावा देती है।”