महिला आरक्षण अधिनियम: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनावों में जल्द लागू होने की संभावना
केंद्र सरकार परिसीमन और जनगणना अभ्यास पूरा होने से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने पर विचार कर रही है। इससे लोकसभा और राज्य...

मुख्य बातें
क्या हुआ: केंद्र सरकार परिसीमन और जनगणना अभ्यास पूरा होने से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने पर विचार कर रही है।
महत्व क्यों: इससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने में तेजी आ सकती है।
लोगों के लिए क्या बदलाव: जल्दी लागू होने से 2027 के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में महिलाएं आरक्षित सीटों पर आ सकती हैं।
कौन प्रभावित: राजनीतिक प्रतिनिधित्व चाहने वाली महिलाएं, राजनीतिक दल और उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मतदाता।
जल्दी लागू करने के लिए परिसीमन से अलग
केंद्र सरकार परिसीमन और जनगणना अभ्यास पूरा होने से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने की संभावना तलाश रही है। इस कदम का उद्देश्य संभावित रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अधिनियम को लागू करना है।
लॉटरी प्रणाली पर विचार
गंभीरता से विचार किए जा रहे विकल्पों में से एक लॉटरी प्रणाली की शुरुआत है। यह प्रणाली उन एक तिहाई निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण करेगी जिन्हें महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाना है।
सरकार को विपक्ष की सहमति की तलाश
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं के साथ बातचीत की है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से दो बार बात की है, और अधिनियम में संशोधन पर पार्टी की राय मांगी है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम
महिला आरक्षण अधिनियम, 2023, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में भी जाना जाता है, संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम है। इसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है।
आगे क्या देखना है
भविष्य के घटनाक्रमों में महिला आरक्षण अधिनियम में संभावित संशोधनों के संबंध में सरकार और विपक्षी दलों के बीच आगे की परामर्श शामिल होने की संभावना है। लॉटरी प्रणाली को लागू करने और परिसीमन और जनगणना से पहले आगे बढ़ने का निर्णय भी महत्वपूर्ण होगा।
