भोपाल के घाटों पर दुर्गा विसर्जन का कचरा अब तक नहीं हटा, छठ पूजा की तैयारी के बीच गंदगी से बढ़ी चिंता
छठ पूजा से ठीक एक दिन पहले भोपाल के कई प्रमुख घाटों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दुर्गा विसर्जन के बाद जमा हुआ कचरा...

छठ पूजा से ठीक एक दिन पहले भोपाल के कई प्रमुख घाटों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दुर्गा विसर्जन के बाद जमा हुआ कचरा अब तक पूरी तरह साफ नहीं किया गया है। लकड़ी के ढांचे, मूर्तियों के अवशेष और पूजा सामग्री के ढेर भदभदा, प्रेमपुरा और खतलापुरा घाट के आसपास बिखरे पड़े हैं, जिससे बदबू फैल रही है और आसपास का क्षेत्र कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है।
नवरात्रि के बाद से अधूरा सफाई अभियान
करीब एक माह बीतने के बावजूद नगर निगम का सफाई अभियान अधूरा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गणेश और दुर्गा विसर्जन के दौरान निकले अपशिष्ट को समय पर नहीं हटाया गया। प्रेमपुरा घाट पर तो कचरे का अंबार लग गया है, जिससे आसपास के जलाशयों में प्रदूषण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, मूर्तियों में प्रयुक्त रंग और रासायनिक पदार्थ जलस्रोतों के लिए हानिकारक होते हैं। अगर इन्हें समय पर नहीं हटाया गया, तो यह आने वाले हफ्तों में पानी की गुणवत्ता पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
नगर निगम ने शुरू की तैयारियाँ
भोपाल नगर निगम (BMC) ने आगामी छठ पूजा को देखते हुए साफ-सफाई और सुरक्षा तैयारियाँ तेज कर दी हैं। निगम द्वारा शहर में लगभग 50 अस्थायी घाट और छह मुख्य घाट — नीलबड़, प्रेमपुरा, फाइव नंबर स्टॉप, भीम नगर और शीतेलदास की बगिया — पर प्रकाश, पेयजल, बदलने के कमरे और सुरक्षा व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
छोटे स्तर पर मरम्मत कार्य जैसे सड़क समतलीकरण, रंगाई-पुताई और अस्थायी ढांचे की मजबूती का काम जारी है। निगम ने पूजा सामग्री के उचित निपटान के लिए अलग-अलग ज़ोन तय किए हैं और भीड़ प्रबंधन के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना बनाई है।
महापौर करेंगी निरीक्षण
महापौर मालती राय शुक्रवार को प्रमुख घाटों का दौरा करेंगी और तैयारियों का जायजा लेंगी। निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि “मुख्य तैयारियाँ लगभग पूरी कर ली गई हैं। शेष बचा दुर्गा विसर्जन का कचरा छठ पूजा शुरू होने से पहले हटा दिया जाएगा।”
शहर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा पर्व
छठ पूजा भोपाल की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। विशेष रूप से भोजपुरी समुदाय के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। नगर निगम के अनुसार, इस वर्ष लगभग तीन लाख से अधिक लोग आयोजन में भाग लेंगे। इसलिए स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
पर्यावरण और प्रशासन के लिए संदेश
विशेषज्ञ मानते हैं कि हर साल धार्मिक आयोजनों के बाद घाटों की सफाई में देरी से जल प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। पर्यावरणविदों का सुझाव है कि निगम को “विसर्जन-के-बाद” सफाई के लिए एक निश्चित समयसीमा तय करनी चाहिए, ताकि अगली धार्मिक गतिविधियों से पहले घाट पूरी तरह स्वच्छ रहें।
