जनजातीय कार्य विभाग ने छात्रवृत्ति योजनाओं में बड़ा सुधार प्रस्तावित किया — आय वर्ग घटेंगे, छात्रवृत्ति राशि बढ़ेगी
छात्रवृत्ति योजनाओं में एकरूपता की दिशा में कदम जनजातीय कार्य विभाग ने राज्य की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं को सरलीकृत और मानकीकृत करने का प्रस्ताव सरकार...

छात्रवृत्ति योजनाओं में एकरूपता की दिशा में कदम
जनजातीय कार्य विभाग ने राज्य की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं को सरलीकृत और मानकीकृत करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। इसका उद्देश्य है कि अलग-अलग विभागों में चल रही छात्रवृत्ति योजनाओं में समानता लाई जा सके और छात्रों को लाभ पाने की प्रक्रिया आसान बने।
विभाग ने इस प्रस्ताव की प्रस्तुति मुख्य सचिव के समक्ष पहले ही दे दी है।
तीन की जगह दो आय वर्ग
वर्तमान में छात्रवृत्ति के लिए तीन आय वर्ग लागू हैं —
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₹2.50 लाख तक वार्षिक आय
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₹2.50 लाख से ₹8 लाख तक
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₹8 लाख से अधिक
प्रस्ताव के अनुसार, ₹8 लाख से अधिक आय वर्ग को छात्रवृत्ति पात्रता सूची से बाहर रखा जाएगा। यानी आगे चलकर केवल दो श्रेणियाँ रहेंगी — ₹2.50 लाख तक और ₹2.50 लाख से ₹8 लाख तक।
समानता पर जोर: SC, ST और DNT को बराबर लाभ
विभाग का प्रस्ताव कहता है कि कक्षा 9 से 12 तक के लिए SC, ST और Denotified Nomadic Tribes (DNT) छात्रों को समान छात्रवृत्ति राशि दी जाए।
हालांकि, OBC छात्रों को इन वर्गों की तुलना में 50% छात्रवृत्ति देने की अनुशंसा की गई है। यह व्यवस्था, विभाग के अनुसार, छात्रवृत्ति वितरण में समानता और व्यावहारिकता दोनों सुनिश्चित करेगी।
छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि का प्रस्ताव
योजना क्रमांक 6175 (केंद्र प्रायोजित प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना कक्षा 9-10 के लिए, ₹2.5 लाख आय सीमा के तहत) में राशि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है —
| श्रेणी | वर्तमान राशि | प्रस्तावित राशि | अतिरिक्त वित्तीय बोझ |
|---|---|---|---|
| ST आवासीय छात्र (लड़का) | ₹6,250 | ₹7,000 | ₹6.95 करोड़ |
| ST गैर-आवासीय छात्र (लड़का) | ₹3,000 | ₹3,500 | — |
| ST आवासीय छात्रा (लड़की) | ₹6,250 | ₹7,000 | ₹7.37 करोड़ |
| ST गैर-आवासीय छात्रा (लड़की) | ₹3,000 | ₹3,500 | — |
विभाग का मानना है कि यह बढ़ोतरी न केवल छात्रों की जीवन-यापन लागत को संतुलित करेगी बल्कि विद्यालय में निरंतर उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन को भी प्रोत्साहित करेगी।
राज्य पर वित्तीय प्रभाव
इस प्रस्ताव से राज्य पर कुल मिलाकर लगभग ₹14.32 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आने का अनुमान है। हालांकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में यह खर्च राज्य के लिए फायदेमंद रहेगा, क्योंकि इससे जनजातीय और पिछड़े समुदायों में शिक्षा दर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
समान अवसर की दिशा में सुधार
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव, अगर मंज़ूर हो जाता है, तो राज्य की छात्रवृत्ति प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनाएगा। इससे न केवल प्रशासनिक जटिलता घटेगी बल्कि लाभार्थियों को समान अवसर भी मिलेगा।
राज्य सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव पर विचार कर इसे अगले वित्तीय वर्ष की छात्रवृत्ति नीति में शामिल कर सकती है।
