भोपाल में पटाखों की धमक से फटा कान, घायल हुए कई लोग — दीपावली पर दर्ज हुए दर्जनों हादसे
पटाखों की धमक बनी खतरा, कई लोग घायल दीपावली की रात भोपाल में उत्सव के बीच पटाखों की तेज़ आवाज़ों और धमाकों ने कई परिवारों...

पटाखों की धमक बनी खतरा, कई लोग घायल
दीपावली की रात भोपाल में उत्सव के बीच पटाखों की तेज़ आवाज़ों और धमाकों ने कई परिवारों की खुशी को चिंता में बदल दिया। शहर के अलग-अलग हिस्सों से कई लोग घायल होकर अस्पताल पहुँचे, जिनमें से छह से अधिक लोगों के कान के पर्दे (eardrum) फटने की पुष्टि हुई है।
हमीदिया और AIIMS में पहुँचे मरीज
घायलों का इलाज हमीदिया अस्पताल, AIIMS भोपाल, जेपी अस्पताल और कई निजी चिकित्सा केंद्रों में किया गया।
जेपी अस्पताल के नागरिक सर्जन डॉ. संजय जैन ने बताया कि दीपावली की रात आपातकालीन वार्ड में लगभग 12 मरीज पहुंचे, जिनमें सात लोग पटाखों से घायल हुए थे।
उन्होंने बताया कि “अधिकांश घायलों को आंखों और कानों में चोटें आई हैं, कुछ मामलों में बारूद के कण आंखों में चले जाने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।”
rope bomb के धमाके से फटा कान
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एस. पी. दुबे ने एक गंभीर मामला साझा किया। उनके अनुसार, “धनतेरस के दिन एक युवक अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर जश्न मना रहा था। तभी पास में एक rope bomb फोड़ा गया। तेज़ और कर्कश धमाके के बाद उसके कान में झनझनाहट और जलन महसूस हुई। जांच में पाया गया कि उसका कान का पर्दा फट गया है।”
डॉ. दुबे ने बताया कि “कान का पर्दा बेहद नाजुक होता है और तेज़ आवाज़, विस्फोट या यहां तक कि जोरदार थप्पड़ से भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।”
दो दिनों में 35 सड़क हादसे भी दर्ज
आपातकालीन एंबुलेंस सेवा से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, दीपावली और धनतेरस के दो दिनों में 35 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से कई मामलों में तेज़ रफ्तार, पटाखों के धुएं और भीड़भाड़ को मुख्य कारण माना गया।
विशेषज्ञों की सलाह: सावधानी ही सुरक्षा
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि तेज़ धमाकों से उत्पन्न ध्वनि (150 डेसीबल से अधिक) कान की झिल्ली को फाड़ सकती है, जिससे स्थायी सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
डॉ. दुबे ने कहा, “यदि किसी के कान में जलन, दर्द या आवाज़ बंद महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। घरेलू उपचार से स्थिति और बिगड़ सकती है।”
निष्कर्ष
दीपावली पर जहां एक ओर रोशनी और उत्साह का माहौल रहा, वहीं लापरवाही और असावधानी ने कई लोगों को दर्दनाक अनुभव दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले त्योहारों पर कम-शोर वाले, पर्यावरण-मित्र पटाखों का उपयोग कर ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है।
