छिंदवाड़ा-बेतूल खांसी सिरप कांड: एमपी एसआईटी ने तमिलनाडु सरकार को भेजा नोटिस, स्रेशन फार्मा के निरीक्षण और ऑडिट रिकॉर्ड मांगे
छिंदवाड़ा और बेतूल में बच्चों की मौत के बाद गठित मध्य प्रदेश की विशेष जांच टीम (SIT) ने तमिलनाडु सरकार के फूड सेफ्टी एंड ड्रग...

छिंदवाड़ा और बेतूल में बच्चों की मौत के बाद गठित मध्य प्रदेश की विशेष जांच टीम (SIT) ने तमिलनाडु सरकार के फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट को नोटिस जारी किया है। एसआईटी ने स्रेशन फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े निरीक्षण, ऑडिट और अनुपालन (compliance) रिकॉर्ड तलब किए हैं — वही कंपनी जिसने जहरीला Coldrif सिरप तैयार किया था।
क्या है पूरा मामला
बीते महीनों में छिंदवाड़ा और बेतूल जिलों में 19 बच्चों की मौत के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच एसआईटी को सौंपी थी। अब तक टीम ने मृत बच्चों के मेडिकल रिकॉर्ड इकट्ठे कर लिए हैं, जबकि बाकी मामलों का दस्तावेजीकरण जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि Coldrif सिरप के निर्माण के दौरान आवश्यक गुणवत्ता परीक्षण (contaminant screening) नहीं किए गए थे।
एसआईटी ने मांगी तमिलनाडु प्रशासन की जवाबदेही
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एसआईटी यह जानना चाहती है कि तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल अधिकारियों ने स्रेशन फार्मा में अंतिम बार कब निरीक्षण किया था और क्या उन्होंने केवल कागजी जांच की या वास्तविक साइट निरीक्षण भी किया था।
उन्होंने कहा, “हम यह भी देख रहे हैं कि क्या उत्पादन के दौरान सॉल्वेंट के सैंपल स्वतंत्र रूप से जांचे गए थे, बैच में कोई विचलन दर्ज किया गया था या नहीं, और क्या थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट हुए थे।”
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताई सख्ती
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में तमिलनाडु सरकार पर “नियामक लापरवाही और समय पर हस्तक्षेप न करने” का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि यह त्रासदी निर्माण स्तर की गंभीर चूक का परिणाम है, जिसे दक्षिणी राज्य के अधिकारियों को समय रहते पकड़ लेना चाहिए था।
उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस अपराध की हर कड़ी की जिम्मेदारी तय हो। जो भी इस जहर को बच्चों तक पहुंचाने में शामिल था, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।”
जांच में खुलासा: लैब टेक्नीशियन की बड़ी लापरवाही
जांच अधिकारियों ने पाया कि स्रेशन फार्मा की महिला लैब तकनीशियन के. महेश्वरी ने बैच टेस्टिंग के दौरान आवश्यक contaminant screening नहीं की।
एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने कहा, “अगर यह परीक्षण किया गया होता, तो जहरीला सिरप कभी फैक्ट्री से बाहर नहीं जाता। एक छोटी-सी लापरवाही ने मासूम जिंदगियां छीन लीं।”
आगे की दिशा — जिम्मेदारी तय होगी
एसआईटी का अगला चरण नियामक ढांचे में व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने पर केंद्रित होगा। जांच टीम अब गुणवत्ता नियंत्रण श्रृंखला (quality control chain), प्रोक्योरमेंट विंग और सुपरवाइजरी अधिकारियों की भूमिका भी खंगाल रही है जिन्होंने संदिग्ध बैच को मंजूरी दी थी।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ सकता है, और तमिलनाडु के दवा नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।
