मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा सबसे खराब राज्यों में, साक्षरता दर भी लगातार गिरावट पर
मध्य प्रदेश में डिजिटल शिक्षा की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। शिक्षा मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा...

मध्य प्रदेश में डिजिटल शिक्षा की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। शिक्षा मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा के मामले में देश में चौथे सबसे निचले स्थान पर है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब राज्य की साक्षरता दर भी लगातार घट रही है।
🌐 सरकारी स्कूलों में डिजिटल ढांचा बेहद कमजोर
शिक्षा मंत्रालय की यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+ 2024-25) रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के केवल 35.3% सरकारी स्कूलों में ही इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है।
देशभर में 25 से अधिक राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में यह सुविधा 50% से अधिक है, जबकि दिल्ली, चंडीगढ़, लक्षद्वीप और पुडुचेरी जैसे प्रदेशों में यह आंकड़ा 100% है।
मध्य प्रदेश से भी नीचे केवल तीन पूर्वोत्तर राज्य — अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मणिपुर हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट की कमी से छात्रों को डिजिटल लर्निंग, ऑनलाइन क्लास और स्मार्ट क्लासरूम जैसे अवसरों से वंचित रहना पड़ रहा है, जिससे ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच की खाई और चौड़ी होती जा रही है।
📉 लगातार गिर रही साक्षरता दर
राज्य में साक्षरता दर का घटता ग्राफ एक और बड़ी चिंता है।
केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:
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2021–22 में साक्षरता दर 76.7%,
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2022–23 में घटकर 76.4%,
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और 2023–24 में और नीचे गिरकर 75.2% रह गई।
इसके विपरीत, राष्ट्रीय औसत साक्षरता दर इस अवधि में बढ़ी है —
79.7% (2021–22) से बढ़कर 80.9% (2023–24) तक।
यह अंतर बताता है कि जहां देश आगे बढ़ रहा है, वहीं मध्य प्रदेश शिक्षा और साक्षरता के मोर्चे पर पीछे छूटता जा रहा है।
🏛️ सरकार की चुप्पी और जवाबदेही पर सवाल
राज्य सरकार ने अब तक राज्य की नवीनतम साक्षरता दर साझा नहीं की है। 21 जुलाई को राज्यसभा में केंद्र सरकार ने यह गिरावट आधिकारिक रूप से स्वीकार की, वहीं 13 मार्च को विधानसभा में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने एक लिखित जवाब में कहा कि “2011 की जनगणना के बाद केंद्र सरकार ने कोई नई जनगणना नहीं कराई है, इसलिए वर्तमान साक्षरता दर निर्धारित करना संभव नहीं है।”
2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की साक्षरता दर 69.3% थी। तब से अब तक की वास्तविक प्रगति का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड राज्य के पास नहीं है।
🗣️ विशेषज्ञों की राय
शिक्षाविदों का कहना है कि राज्य में शिक्षा बजट का बड़ा हिस्सा अभी भी भौतिक संरचनाओं पर खर्च होता है, जबकि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में निवेश की कमी है।
भोपाल स्थित शिक्षा विश्लेषक डॉ. अजय दुबे ने कहा, “इंटरनेट और डिजिटल टूल्स की अनुपलब्धता से सरकारी स्कूलों के छात्र प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं। सरकार को अब केवल स्कूल भवन नहीं, बल्कि स्मार्ट लर्निंग नेटवर्क पर फोकस करना होगा।”
💡 आगे की राह
शिक्षा मंत्रालय के विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि राज्य को केंद्र की डिजिटल इंडिया मिशन और PM eVidya जैसी योजनाओं के तहत स्कूलों को कनेक्टिविटी देने में तेजी लानी चाहिए। साथ ही, ब्लॉक स्तर पर डिजिटल रिसोर्स सेंटर बनाए जाने की सिफारिश की गई है ताकि शिक्षक और छात्र दोनों डिजिटल शिक्षा से लाभान्वित हो सकें।
