छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड के बाद सरकार हरकत में: दवा निरीक्षकों को दी जाएगी विशेष प्रशिक्षण, जल्द बढ़ेगी टीम की संख्या
छिंदवाड़ा में खांसी की दवा से 27 बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार अब दवा निरीक्षण प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में...

छिंदवाड़ा में खांसी की दवा से 27 बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार अब दवा निरीक्षण प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। राज्य सरकार जल्द ही सभी दवा निरीक्षकों को औषधि कंपनियों और मेडिकल स्टोर्स की जांच प्रक्रिया का विशेष प्रशिक्षण देने जा रही है।
🧪 निरीक्षकों को नहीं पता जांच प्रक्रिया
राज्य में फिलहाल 79 दवा निरीक्षक (Drug Inspectors) कार्यरत हैं। इनमें से कई हाल ही में नियुक्त हुए हैं और उन्हें दवा निर्माण इकाइयों तथा दवा दुकानों की तकनीकी जांच की जानकारी नहीं है। ऐसे में औषधि नियंत्रण विभाग अब उनके लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेगा, जिसमें उन्हें दवाओं की सैंपलिंग, गुणवत्ता परीक्षण, और नियमों के अनुपालन से जुड़ी बारीकियां सिखाई जाएंगी।
🏭 राज्य में 232 दवा निर्माण इकाइयां
मध्य प्रदेश में कुल 232 औषधि निर्माण इकाइयां पंजीकृत हैं। सरकार ने इन सभी इकाइयों की सघन जांच का निर्णय लिया है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद निरीक्षक क्रमवार रूप से इन कंपनियों का दौरा करेंगे और उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, तथा लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों की जांच करेंगे।
💬 सरकार का बयान और आगे की योजना
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि “राज्य में मौजूद दवा कंपनियों की संख्या के अनुपात में दवा निरीक्षकों की जरूरत का आकलन किया जा रहा है। इसके बाद नए निरीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार ड्रग टेस्टिंग प्रयोगशालाओं को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रही है ताकि राज्य में दवा गुणवत्ता की जांच तेज और पारदर्शी हो सके।
⚠️ छिंदवाड़ा हादसे के बाद उठे सवाल
छिंदवाड़ा में खांसी की दवा से हुई 27 बच्चों की मौत ने राज्य में दवा नियंत्रण प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर किया था। जांच में पाया गया कि संबंधित कंपनी ने कई नियमों का उल्लंघन किया था और निरीक्षण तंत्र की लापरवाही के कारण दवा बाजार तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निरीक्षकों को पहले से पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण होता, तो इस तरह की त्रासदी को रोका जा सकता था।
🩺 सुधार की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का यह कदम औषधि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित प्रशिक्षण और आधुनिक लैब सुविधाएं राज्य की दवा सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बना सकती हैं।
